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जवाबदेही का कानून

प्रधानमंत्री ने प्रशासन को जनता का सेवक बनाने के लिए कमर कस ली है। स्पष्ट है कि उदारीकरण के युग में कोटा परमिट राज वाली मशीनरी नहीं चलेगी, लेकिन उसकी जरूरत इस व्यवस्था में भी रहेगी, इसलिए उसमें सुधार जरूरी है। अगर अधिकारियों को जनता की जरूरी सेवाओं के लिए जवाबदेह बनाने का कानून बन गया तो यह सूचना के अधिकार के बाद की बड़ी क्रांति होगी। इससे सूचना के अधिकार के सैद्धांतिक और अमूर्त स्वरूप को व्यावहारिक और मूर्त रूप प्राप्त होगा।

सरकार की योजना नागरिक को वे जरूरी सेवाएं निर्बाध तौर पर मुहैया कराने की हैं जिसके लिए वह दर-दर भटकता रहता है और जिसमें सरकार का विशेष व्यय भी नहीं होता। राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाताओं का पंजीकरण, पहचान पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, अनुसूचित जाति और ओबीसी प्रमाण पत्र जैसी नागरिक पहचान से जुड़ी नौ तरह की सेवाएं ऐसी होंगी जिनके समय पर न मिलने से संबंधित अधिकारी पर जुर्माना लग सकता है। इतना ही नहीं अगर किसी व्यक्ति का फार्म ठीक से नहीं भरा गया है तो इसके लिए वह व्यक्ति नहीं बल्कि संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होगा।

जाहिर है अब तक अधिकारी और कर्मचारी केंद्रित प्रशासनिक मशीनरी जनता केंद्रित होने जा रही है। यह सारे काम ऐसे होते थे जिनके लिए बड़ी संख्या में दलाली, रिश्वतखोरी और नेतागिरी होती रही है। इन स्थितियों से ऊबकर गरीब , पिछड़ी और आदिवासी जनता सरकार से अलगाव के हद तक दूरी बना लेती है।  इसी से खीझकर एक बार उड़ीसा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने जनता से  अधिकारियों का गिरेबान पकड़ लेने का विवादास्पद बयान भी दिया था।

उम्मीद है कि पहले दिल्ली के स्तर पर फिर केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाने वाला यह प्रस्तावित प्रयोग धीरे-धीरे देश के अन्य राज्यों में भी जाएगा और सरकार से उठते जनता के भरोसे को बहाल करेगा, लेकिन प्रशासनिक सुधार के दूरगामी असर वाले इस कदम के सामने यही चुनौती भी है। क्या वह उस जमीनी स्तर तक पहुंचेगा जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है? अगर पहुंचेगा तो उसमें कितना समय लगेगा? क्या विभिन्न पार्टियों के शासन वाले राज्य इसे लागू करने के लिए उसी तरह उत्साहित होंगे जिस तरह प्रधानमंत्री कार्यालय है? दलाल, भ्रष्ट और नकारा लोगों को दरकिनार करने वाले इस कदम के विरोध में लामबंदी भी हो सकती है और विभिन्न राज्यों के नागरिक संगठनों की तरफ से इसके लिए मांग भी उठ सकती है। जाहिर है प्रधानमंत्री कार्यालय से निकली यह बात दूर तलक जाएगी और इसे जाना भी चाहिए।

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