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कोर्ट ने कहा, जीवन भर के लिए होती है उम्रकैद

कोर्ट ने कहा, जीवन भर के लिए होती है उम्रकैद

उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी है कि हत्या के मामलों में उम्र कैद की सजा पाए दोषी लोग न्यूनतम 14 साल कैद में गुजारने के बाद विशेष संवैधानिक प्रावधानों को छोड़कर रिहाई के किसी अधिकार का दावा नहीं कर सकते। शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि उम्र कैद के मामले में दोषी को न्यूनतम 14 साल कारावास गुजारना चाहिए।

न्यायमूर्ति अल्तमास कबीर और न्यायमूर्ति साइरिएक जोसफ ने छत्तीसगढ़ सरकार को यह निर्देश देने के दौरान यह टिप्पणी कि वह उम्र कैद की सजा काट रहे एक दोषी रामराज के कम से कम 20 साल कारावास को सुनिश्चित कराए।

गोडसे के मामले में निर्णय के बाद आए विभिन्न फैसलों में बार-बार कहा गया कि उम्र कैद के मायने दोषी के प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास में रहने से हैं। हालांकि, माफी मिलने के चलते कारावास की वास्तविक अवधि कम हो सकती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि लेकिन संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को मिले अधिकारों के संभावित अपवाद और अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को प्रदत्त अधिकार के तहत माफी मिलने पर भी उम्र कैद की सजा कम कर 14 वर्ष तक हो सकती है। शीर्ष अदालत ने रामराज की अपील खारिज कर दी, जिसने दावा किया था कि वह उसे मिली माफी के तहत अवधि की गणना के बाद 14 साल बाद रिहाई का हकदार है।

 

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