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बीएचयू में म्यूजिकोलॉजी और एथोम्यूजिकोलॉजी पर दो दिवसीय सेमिनार शुरू

संगीतशास्त्र संगीत का विज्ञान है। इसमें संगीत के विविध सिद्धांत और अवधारणाओं का अध्ययन किया जाता है। उक्त विचार सेंटर ऑफ एथोम्यूजिकोलॉजी (चेन्नई) की संस्थापक निदेशिक और चेन्नई विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस एसएके दुर्गा ने व्यक्त किए।

प्रो. दुर्गा बीएचयू के संगीतशास्त्र विभाग के तत्वावधान में पं. ओंकार नाथ ठाकुर प्रेक्षागृह में सोमवार को म्यूजिकोलॉजी और एथोम्यूजिकोलॉजी पर विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य वक्ता बोल रहीं थीं।

उन्होंने कहा कि एथोम्यूजिकोलॉजी शब्द ठीक नहीं है क्योंकि पाश्चात्य विद्वानों ने इसे अविकसित या लोक परंपरा से जोड़कर बताया है। जबकि इसका अध्ययन पहले से तुलनात्मक संगीतशास्त्र के रूप में किया जाता था। यह विविध प्रांतों के संगीत के सांस्कृतिक आदान-प्रदान के इतिहास का अध्ययन है।

मुख्य अतिथि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. अवधराम ने कहा कि यह बात साबित हो चुकी है की संगीत सुनने के बाद मन को सुकून मिलता है। तनाव, मूर्छा, मिर्गी आदि के मरीजों के लिए संगीत चिकित्सा बहुत महत्वपूर्ण है।

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. इंद्राणी चक्रवर्ती ने भी एथोम्यूजिकोलॉजी शब्द पर आपत्ति दर्ज कराते हुए संगीतशास्त्र में संगीत के साथ अन्य विषयों के तुलनात्मक अध्ययन पर बल दिया। अध्यक्षता करते हुए बीएचयू रेक्टर प्रो. बीडी सिंह ने कहा कि संगीत और संगीतशास्त्र की अवधारणाओं का मानव जीवन में समावेश करना चाहिए। इससे व्यवहारिक ज्ञान बढ़ता है और आपसी तनाव कम होता है। शांति के लिए संगीत का अध्ययन आवश्यक है।

तकनीकी सत्र में प्रो. इंद्राणी चक्रवर्ती ने वृंदवादन और कुतप पर शास्त्रग्रंथ आधारित सिद्धांतों को बताया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रो. स्वतंत्र शर्मा ने संगीतशास्त्र के विविध पहलुओं पर चर्चा की। अतिथियों का स्वागत म्यूजिकोलॉजी विभाग की अध्यक्ष प्रो. लिपिकादास गुप्ता व धन्यवाद ज्ञापन डा. शिवराम शर्मा ने किया।

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  • Web Title:‘संगीत का विज्ञान है संगीतशास्त्र’