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54 लाख के लिए वीडीए और एसएलओ में ठनी

शासन से निरस्त हो चुकी लोढान आवासीय योजना के प्रशासनिक खर्च को लेकर वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) और विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग (एसएलओ) में ठन गई है।

17 फरवरी 89 को वीडीए ने आवासीय योजना बनाई थी, लेकिन जनविरोध के चलते यह योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। इस योजना के लिए वीडीए ने एसएलओ को 3 करोड़ 54 लाख रुपये दिये थे। एसएलओ ने प्रशासनिक खर्च बताकर 54 लाख देने से मना कर दिया। वीडीए के अफसरों का कहना है कि जब जमीन ही नहीं मिली तो प्रशासनिक खर्च कैसा?

सिंधोरा रोड पर 23.135 हेक्टेयर में लोढ़ान आवासीय योजना बनाई गई थी। इस योजना के लिए 18 जनवरी 03 को धारा-चार और 21 जनवरी 04 को धारा-छह का प्रकाशन हुआ। कुल 195 किसानों की जमीनों का अधिग्रहण होना था।

इनमें ज्यादातर किसान ऐसे थे जिनके पास अधिक जमीनें नहीं थीं। इसके चलते किसानों ने इस योजना का विरोध शुरू कर दिया। विरोध को देखते हुए शासन को यह योजना रद्द करनी पड़ी। 6 फरवरी 07 को विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग ने तीन करोड़ रुपये वीडीए को लौटा दी। बाकी 45 लाख रुपये नहीं दिया। इसी धन को लेकर दोनों विभागों में ठन गई है।

वीडीए सचिव आरपी सिंह का कहना है कि विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग ने जब जमीन ही मुहैया नहीं कराई तो प्रशासनिक व्यय के रूप में 45 लाख रुपये क्यों काट लिया। उन्होंने कहा कि एसएलओ अगर जमीन मुहैया कराए तो वीडीए उसे लेने के लिए तैयार है।

मौजूदा सर्किल रेट पर किसानों को मुआवजा दिया जा सकता है। दूसरी ओर एलएलओ ज्ञानेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि 54 लाख रुपये नियमानुसार काटा गया है। लोढ़ान आवासीय योजना के लिए धारा-4 व धारा-6 के प्रकाशन में विभाग ने काफी मेहनत की है। वीडीए  अधिकारी चाहें तो उन्हें शासन के आदेशों से अवगत कराया जा सकता है।

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