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बिजली परियोजनाएं समृद्धि का द्वार खोलेंगी

यूपी के चार टुकड़े हुए तो बुंदेलखंड और शेष बचे यूपी में जिले तो कम होंगे लेकिन चुनौतियाँ भरपूर होंगी। इन दो राज्यों में न तो वन होंगे, न ही पर्याप्त संख्या में उद्योग। लेकिन पूर्वाचल का गठन इस इलाके में समृद्धि लाएगा।

शेष यूपी और बुंदेलखंड के हाल खस्ता होने के बारे में विशेषज्ञ एकमत हैं, हालांकि उनमें इस पर एक राय नहीं कि अलग बनने वाले राज्यों में किसे कितना फायदा होगा। अर्थशास्त्री डॉ. अरविंद मोहन की मानें तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 57 फीसदी तथा पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में 40 फीसदी उद्योग हैं जबकि बुंदेलखण्ड में तीन-चार फीसदी।

इसी तरह कृषि क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में करीब 45 फीसदी पूर्वी और मध्य यूपी में करीब 50 फीसदी हिस्सा रह जाएगा जबकि बुंदेलखण्ड में 5 फीसदी ही जाएगा। ऐतिहासिक और धार्मिक पयर्टन की दृष्टि से आगरा और मथुरा के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बौद्ध सर्किट की वजह से पूर्वी क्षेत्र को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

डॉ. मोहन का मानना है कि बुंदेलखण्ड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश अलग होने पर पूर्वी यूपी की हालत सुधरेगी लेकिन मध्य यूपी में उद्योग और कृषि को बढ़ावा देना निहायत जरूरी होगा।

योजना विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि यूपी से अलग होने पर उत्तरांचल अब उत्तराखंड ने उद्योगों को छूट दिए जिससे वहां नए उद्योग भारी संख्या में लगे। इसी तरह बिहार से खनिज सम्पदा वाला झारखण्ड भले ही अलग हो गया, पहले की तुलना में बिहार की विकास दर में सुधार आया है। इसका मुख्य कारण है कि नक्सली इलाका झारखण्ड में चला गया।

शेष बिहार में गुण्डागर्दी और माफिया से निपटने में सरकार ने ध्यान दिया। इसी तरह यदि यूपी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश अलग हुआ तो महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र उसके हिस्से में चले जाएँगे। लेकिन  पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी काफी सम्भावनाएँ हैं। कृषि भूमि अधिक है। यदि बिजली, सड़क आदि की सुविधाएँ दी गईं तो औद्योगिक दृष्टि से यह क्षेत्र निश्चित रूप से आगे बढ़ेगा।

यूपी के पूर्व मुख्य सचिव वी.के. मित्तल का भी कहना है कि उत्तराखंड में नए उद्योग लगने से यूपी के सीमावर्ती जिलों के उद्योग या तो बंद हो गए या उत्तराखंड शिफ्ट हो गए। इससे यूपी का काफी नुकसान हुआ।

यूपी के फिर तीन हिस्से किए जाने पर इन तीनों क्षेत्रों केआर्थिक प्रतिद्वंद्विता को देखना होगा। साथ ही क्षेत्रवार प्राकृतिक संसाधनों के साथ ही प्रति व्यक्ति आय के स्वरूप को भी देखना होगा। जर्जर हो रही ऐतिहासिक सम्पदाओं के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा।

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