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कोपेनहेगेन समिट फेल होने की आशंका बढ़ी

कोपेनहेगेन समिट फेल होने की आशंका बढ़ी

विकसित देशों के अड़ियल रवैये के कारण कोपेनहेगेन क्लाइमेट चेंज समिट में किसी तरह के वैश्विक समझौते की उम्मीदें सोमवार को टूटती नजर आईं। क्योटो प्रोटोकॉल में तय सिद्दांतों को भविष्य में कार्बन उत्सर्जन रोकने की योजना में शामिल करने का विरोध कर रहे आस्ट्रेलिया से नाराज अफ्रीकी देशों के समूह ने शुरुआती चरण की बैठक का बहिष्कार कर दिया।

उसके इस रुख को भारत और चीन ने भी समर्थन दे दिया। अफ्रीकी मुल्क आस्ट्रेलिया के इस प्रस्ताव से नाराज थे कि कार्बन उत्सजर्न व ग्लोबल वार्मिंग रोकने के लिए दीर्घकालीन योजना को नए सिरे से तेयार किया जाए और इसमें क्योटो प्रोटोकॉल की बात ही न हो। कोपेनहेगेन सम्मिट का सबसे महत्वपूर्ण चरण सोमवार से शुरू हुआ। इसकी शुरुआत में ही बड़ा झटका लग गया। जलवायु बदलाव की अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि विकसित और विकासशील देशों के बीच का यह डेडलॉक सम्मिट को फेल करने का अहम कारण बन सकता है। हालाँकि अभी कोशिशें की जा रही हैं कि इस मसले पर एक राय बनाने की कोशिश की जाए।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की निदेशक और पर्यावरण राजनीति की विशेषज्ञ सुनीता नारायण के मुताबिक दुनिया को जलवायु बदलाव के खतरों से बचाने के नजरिए से अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के लिए यह बड़ा झटका है। इसकी पूरी जिम्मेदारी विकसित देशों की है जो है जो यह समझने की कोशिश ही नहीं कर रहे कि उन्हें भविष्य में अपने कार्बन उत्सर्जन की दर को घोषित करना चाहिए। यह घोषणा बाध्यकारी होनी चाहिए ताकि बाद में वह मुकर न सकें। इसके लिए क्योटो प्रोटोकॉल को ध्यान में रखकर ही बातचीत हो सकती है और विकसित देश इसे न मानने पर अड़े हुए हैं।

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