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सीधे संवाद में आरएसएस प्रमुख ने सिखाए जातिगत भेद दूर करने के मंत्र

प्राकृतिक विषमताओं को तो नहीं बदला जा सकता, लेकिन मानव निर्मित विषमताएं हम जरूर बदल सकते हैं। अपनी स्थापना के समय से शुरू हुआ संघ का यह कार्य आगे भी चलता रहेगा।

हम समाज से जातिगत भेद समाप्त करेंगे। यह संकल्प हम लें और इसकी शुरुआत अपने घर से ही करें। सोमवार को कमलानगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर सभागार में शहर के विभिन्न समाज के गणमान्य लोगों के साथ सीधे संवाद में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यह आह्वान किया।

तीन घंटे तक सामाजिक सदभावना कार्यक्रम में लोगों ने जातिवाद दूर करने के अपने प्रयास भी बताए। संघ प्रमुख ने कहा कि जाति का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं होता। इस बात की पुष्टि के लिए उन्होंने हाल में आई कुछ रिपोर्ट का हवाला भी दिया।

उन्होंने भारतीय समाज में जातिगत भेद होने की वजह से धर्मातरण हावी हो जाने की बात कही। यदि मतांतरण अध्यात्म से प्रेरित होता तो विरोध नहीं किया जा सकता, लेकिन ईसाई मिशनरी लोगों को लालच देकर व भय से मतांतरण कर रही हैं।

अब मत परिवर्तन कर चुके लोगों को आरक्षण देने का प्रयास चल रहा है। इसका आरएसएस विरोध करता है। संघ प्रमुख ने कहा कि जातिगत भेद समाप्त करने का लोगों का मन करता है, उनकी बुद्धि भी इसको मान्यता देती है, बस अमल में लाने में चूक हो जाती है।

संघ तो यह कार्य शांति से कर रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियाँ के चलते इसमें तेजी की जरूरत है। उन्होंने सामाजिक कार्यक्रमों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया। संघ प्रमुख ने सभी जातियों के प्रतिनिधियों से कहा कि वे ब्लॉक स्तर पर सामाजिक सद्भावना कार्यक्रम आयोजित करें।

उपेक्षित जातियों के लोगों के साथ मेलजोल बढ़ाएं। संघ के अधिकारी इन कार्यक्रमों में सिर्फ समन्वय की भूमिका निभाएंगे। इससे न सिर्फ सामाजिक समरसता आएगी, बल्कि हेडली जैसे लोग इस देश में छिपने की जुर्रत नहीं कर पाएंगे।

यहां पहुँचे सैकड़ों विभिन्न जातियों के लोगों के साथ संघ प्रमुख ने पंगत में बैठकर भोजन लिया। और जातिगत भेद समाप्त करने की पहल का पहला सबक लोगों को मौके पर ही सिखाया।ह

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  • Web Title:जातिवाद के बंधन तोड़ेगा संघ : मोहन भागवत