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यूपी और एमपी के जिलों को मिलाकर बने बुन्देलखण्ड राज्यः राजा बुंदेला

बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा ने साफ कह दिया है कि मुख्यमंत्री मायावती जिस तरह का अलग बुन्देलखण्ड राज्य बनाना चाहती हैं, वह उसे मंजूर नहीं है।

मोर्चा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र के जिलों को मिलाकर बनने वाले अलग बुन्देलखण्ड राज्य की मांग पर अडिग है। इस पर दबाव बनाने के लिए वह उच्चतम न्यायालय  का दरवाजा खटखटाएगा।

बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष तथा फिल्म अभिनेता राजा बुन्देला ने सोमवार को यहाँ प्रेस क्लब में पत्रकारों से कहा कि लोगों की चेतना को जगाने के लिए मोर्चा 16 दिसम्बर से चित्रकूट के कर्वी से मध्यप्रदेश के खजुराहो तक तीन सौ किलोमीटर की पदयात्रा आयोजित कर रहा है।

यह पदयात्रा एक जनवरी को समाप्त होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि बुन्देलखण्ड के विकास के नाम परअलग-अलग पार्टियों द्वारा बुन्देलखण्ड का 63 वर्षो से शोषण होता रहा है। हमें बुन्देलखण्ड के विकास के लिए परियोजनाएं नहीं, अलग अपना राज्य चाहिए।

इस सम्बंध में केन्द्र सरकार को तुरन्त फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाँच करोड़ बुन्देलखण्डवासी अचानक अलग राज्य की मांग नहीं कर रहे हैं।

बुन्देलखण्ड और बघेलखण्ड के 35 राजाओं ने 1948 में अपनी रियासतों को भारत के अधीन करने के पहले एक ‘संधि’ पर हस्ताक्षर किए थे जिसका आशय था कि सभी रियासतों की एक न्यायपालिका और नगरपालिका हो और एक ही राज्य हो।

इस ‘ट्रीटी’ पर भारत की ओर से श्री मेनन ने हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा आजादी के पहले  बुन्देलखण्ड एक राज्य था और महाराजा छत्रसाल ने इसे बुन्देलखण्ड नाम दिया था।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में अलग से बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण है और अब तो केन्द्र सरकार भी बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण  के गठन की योजना बना रही है।

उन्होंने कहा कि 1955 में बने राज्य पुनर्गठन आयोग ने बुन्देलखण्ड को अलग राज्य का दर्जा देने की बात कही थी लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं होने के कारण उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। इस समय इस क्षेत्र के तीन शासक हैं। एक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती? दूसरे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा तीसरी केन्द्र सरकार लेकिन कोई बुन्देलखण्ड की चिन्ता नहीं कर रहा है।

राजा बुन्देला ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनना है। किसी राजनीतिक दल के साथ उनके संगठन का सम्बन्ध भी नहीं है। मोर्चा सिर्फ उत्तर प्रदेश के इलाकों को अलग राज्य बनाने पर सहमत नहीं होगा। बुन्देलखण्ड राज्य में मध्यप्रदेश के आठ जिलों को भी शामिल करना होगा।

एक सवाल के जवाब में श्री बुन्देला ने कहा कि मोर्चा हिंसा का सहारा नहीं लेते हुए शांति से अपनी बात केन्द्र और दोनों राज्य सरकारों तक पहुँचाना चाहता है। हमारी अपील है कि लोगों की भावनाओं को समझते हुए इस दिशा में तत्काल कदम उठाया जाए।

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  • Web Title:बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा ने मायावती के फार्मूले को नामंजूर किया