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किसी धर्म को न बनाया जाए निशानाः उलेमा

एक पत्नी के रहते दूसरी महिला से विवाह करने पर सख्ती लागू करने के केंद्र सरकार की पहल पर नई बहस शुरू हो गई। खासकर मुस्लिम विद्वानों ने इस कवायद को लेकर साफ कहा है कि कानून की आड़ में किसी खास मजहब को निशाना न बनाया जाए। केवल शादी करने के लिए धर्म बदलने वालों पर सख्ती जरूर अमल में लाई जानी चाहिए।

दारुल उलूम वक्फ के फतवा विभाग के उपप्रभारी मुफ्ती अहसान कासमी कहते हैं कि जो लोग मुजरिमाना सोच के साथ धर्म बदलकर शादियां करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।

उलूम के नायब मोहतमिम तथा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना सूफियान कासमी की राय भी इस बारे में जुदा नहीं है।

वो कहते हैं कि ऐसी सोच के लोगों के साथ सख्ती से पेश आना भी जरूरी है। इसके साथ-साथ यह भी ध्यान रखना होगा कि किसी कानून की आड़ में धर्म विशेष पर निशाना भी न साधा जाए। जिन चंद लोगों ने मजहब को स्वार्थपूर्ति का जरिया मान लिया है, उसके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए।

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