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'नैनोसेंसर्स' तकनीक से जल्द होगी कैंसर की पहचान

'नैनोसेंसर्स' तकनीक से जल्द होगी कैंसर की पहचान

रक्त पर आधारित 'नैनोसेंसर्स' तकनीक की मदद से कैंसर की जल्द पहचान की जा सकती है। यह बात एक नए अध्ययन में सामने आई है।

अध्ययन के मुताबिक मरीजों से रोजाना लिए गए रक्त नमूनों पर इस तकनीक की मदद से किए जाने वाले अध्ययन से कैंसर की जल्द पहचान और इलाज संभव है। इस अध्ययन के परिणाम 13 दिसम्बर को 'नेचर नैनोटेक्नोलॉजी' में ऑनलाइन प्रकाशित हुए।

न्यू हेवन के 'येल इंस्टीट्यूट फॉर नैनोसाइंस एंड क्वांटम इंजीनियरिंग' के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को विकसित किया है।

सह-अध्ययनकर्ता और इंस्टीट्यूट के निदेशक मार्क रीड का कहना है कि इस तकनीक को प्रोस्टेट और स्तन कैंसर के 'बायोमार्कर' (एक विशेष रासायनिक अवस्था के सूचक) को पहचानने के लिए विकसित किया गया है।

रीड कहते हैं, ''कई अन्य प्रकार के 'बायोमार्कर' के लिए भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।'' वह कहते हैं, ''वास्तविक उपलब्धि है यह है कि रक्त नमूनों से इसकी जांच संभव है, यही हमारा लक्ष्य था। ऐसा पहले नहीं किया जा सकता था क्योंकि रक्त में बहुत अधिक नमक और अन्य चीजें होती हैं, जिनकी वजह से इस प्रकार का परीक्षण संभव नहीं था। हमने एक विधि विकसित की है जिसकी मदद से हम रक्त से उन चीजों को अलग कर लेते हैं जिनकी आगे की जांच के लिए आवश्यकता होती है।''

रीड के मुताबिक इसके लिए बहुत थोड़ी मात्रा में रक्त की आवश्यकता होती है और 2० मिनट के अंदर की जांच की यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है। 'अमेरिकन कैंसर सोसायटी' में 'ट्रांस्लेशनल एंड प्री-क्लीनिकल कैंसर रिसर्च' के कार्यक्रम निदेशक विलियम सी. फेल्प्स कहते हैं कि यह बहुत साधारण और कम खर्चीली तकनीक है। फेल्प्स कहते हैं कि कैंसर की पहचान के लिए रक्त में एक विशेष प्रोटीन खोजना पड़ता है, यही प्रोटीन बीमारी को प्रदर्शित करता है। इस प्रोटीन को शुरुआती अवस्था में पहचानना आवश्यक होता है।

यद्यपि चिकित्सकों ने अभी इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू नहीं किया है लेकिन यह खोज कई तरह से क्रांतिकारी है।

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