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शराब भी बढ़ा रही है मतदान का प्रतिशत

नक्सल प्रभावित झारखंड में संगीनों के साए में हो रहे विधानसभा चुनाव के दौरान मतदान के प्रतिशत को बेहतर बनाने में शराब भी अहम भूमिका निभा रही है। राज्य में पांच चरणों में हो रहे मतदान के पहले चरण में 25 नवंबर को औसतन 52 फीसदी वोट पड़े थे जबकि दो दिन पूर्व 12 दिसंबर को चौथे चरण में यह आंकड़ा 60 तक पहुंच गया। कई ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह 70 फीसदी तक रहा। इसके कारणों को लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं? पर अंदरूनी क्षेत्रों का जायजा लेने से साफ जाहिर होता है कि बेहतर सुरक्षा इंतजामों के साथ ही साथ धन और बाहुबल से समर्थ उम्मीदवारों की कृपा से बेहिसाब बंट रही शराब की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है।

चुनावी मौसम के परवान चढ़ने के साथ ही चरण दर चरण गांवों, शहरों और कस्बों में एक तरह से शराब की नदी बहने का सिलसिला तेज हो रहा है। जनहित से दूर हुई राजनीति में लोगों की घटती रूचि के कारण शुरूआती चरणों में कम मतदान से भयभीत नेताओं ने इस मुश्किल से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मौजूद बेरोजगार वोटरों को पिलाने का जबरदस्त अभियान चला रखा है। और संभवत इसका असर भी हो रहा है।

चौथे चरण के मतदान के दौरान देखा कि पोटका विधानसभा क्षेत्र के तेतला में मतदान केंद्र के बाहर वोट देने के लिए लगी लंबी कतार में खड़े अधिकतर पुरूष मतदाताओं ने शराब पी रखी थी। इनमें कुछ ग्रामीण महिलाएं भी शामिल थीं। मतदान केंद्र के भीतर भी शराब की तेज दुर्गंध आ रही थी। इसी क्षेत्र के पावरू मतदान केंद्र के पास भी नशे में धुत कई युवक नजर आ रहे थे। इस मामले में कार्रवाई करने वाला कोई नहीं था। बाहर सुरक्षाकर्मी अपनी डूटी बजा रहे थे और मतदानकर्मी अपने सामने पड़े वोटिंग मशीन की तरह खुद भी यंत्रवत केवल वोट डलवाने के काम में लगे थे।

घाटशिला में मुर्गागुट्ट तेतुलांगा आदि गांवों के लिए माटीगोड़ा में बनाए गए मतदान केंद्र संख्या 181, 182 तथा 176 और 177 के पास कई युवक शराब पीकर मतदान करने जा रहे थे। कुछ तो बाहर शराब पीकर बेहूदी हरकतें कर रहे थे। इस तरह के नजारे चक्रधरपुर, ईचागढ़, मंझगांव, मनोहरपुर, बहरागोड़ा जैसे विधानसभा क्षेत्रों में भी आम थे। कई मतदान अधिकारियों ने कहा कि उन्हें खुशी है कि मतदान का प्रतिशत तो बढ़ रहा है।

घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में रांचीकोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित एक मतदान केंद्र के पास खड़े एक मतदाता ने बताया कि प्रशासन की रोक और घोषित (ड्राई डे) को धता बता कर चुनाव से पहले की रात खूब शराब बांटी गई थी। उसने कहा कि पिछले चुनावों में भी शराब बांटी जाती थी पर इस बार तो एक तरह से रिकार्ड ही बन गया है।  पोटका क्षेत्र में एक मतदान केंद्र के पास खड़े एक युवक ने कहा कि शराब की नदी बहा रहे हमारे नेताओं को विकास के नाम पर थोथी नारेबाजी बंद कर देनी चाहिए। उन्हें बेशर्मी के साथ अब यह नारा देना चाहिए कि शराब का बोलबाला लोकतंत्र का मुंह काला।

चुनावी अध्ययन के लिए झारखंड का दौरा कर रहे एक सामाजिक कार्यकर्ता उमेश रंजन ने अफसोस भरे लहजे में कहा कि शराब वितरण का काम वैसे तो चुनाव अभियान के साथ ही शुरू है पर इसका चरम चुनाव के पहले वाली रात को होता है। इस दौरान सुदूर क्षेत्रों में बोरियों में भर कर शराब भेजी जाती है ताकि अगले दिन अपने पक्ष में (माहौल) बनाने में कुछ कमी न रह जाए। सभी दल एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं चाहे जो भी बांट रहा हो पर चुनाव के दौरान शराब खूब बंट रही है।

उन्होंने कहा कि अनुमानत अब तक चार चरणों के चुनाव में पूरे राज्य में लाखों लीटर शराब बांटी जा चुकी है। और ऐसा लग रहा है कि यह सिलसिला हर चरण के साथ बढ़ता ही गया है। मुफ्त की शराब की खातिर गरीब ग्रामीण वोट देने आते हैं। मतदान के प्रतिशत को बढ़ाने का यह तरीका लोकतंत्र की जड़े खोदने वाला है।
प्रशासन को कम से कम पांचवे और अंतिम चरण में तो इस पर कारगर रोक लगाने का प्रयास करना चाहिए।
बहरहाल मतदान के प्रतिशत में मामूली बढ़ोत्तरी को लेकर अपनी पीठ आप ही ठोक रहे निर्वाचन आयोग को यह भी देखना चाहिए कि शराब के नशे में धुत होकर मतदान करने वाले वोटर लोकतंत्र को आगे बढ़ाएंगे या इसे रसातल में ले जाएंगे।

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  • Web Title:शराब भी बढ़ा रही है मतदान का प्रतिशत