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शोपियां मामले में पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट

शोपियां मामले में पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट

बेहद चर्चित शोपियां मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई)  पांच पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट देते हुए छह डॉक्टरों और पांच वकीलों सहित 13 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। इस साल मई में दो महिलाओं (ननद-भाभी) के शव मिलने के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।

सीबीआई ने जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट को सोमवार को सूचित किया कि झूठे साक्ष्य और गवाह तैयार करने के लिए 13 लोगों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष आरोप पत्र दायर किया गया है।

सीबीआई को इस आरोप के संदर्भ में कोई आधार नही मिला कि तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जावेद इकबाल मटटू, पुलिस उपाधीक्षक रोहित बसगोत्रा, एसएचओ शफीक अहमद और उप निरीक्षक गाजी करीम इस अपराध में शामिल थे।

22 वर्षीय नीलोफर और उसकी 17 वर्षीय ननद आसिया के शव मिलने के बाद शोपियां में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि बलात्कार के बाद ये हत्याएं सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गईं हैं।

हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले में जांच पूरी करने के लिए 13 अक्टूबर को सीबीआई को दो महीने का समय दिया था। सीबीआई ने कहा कि डॉक्टरों ने सही तरह से पोस्टमॉर्टम नहीं किया और यहां तक कि विसरा नमूने भी नहीं लिए।

डॉक्टरों की बलात्कार की थ्योरी की उस समय धज्जियां उड़ गईं जब सीबीआई की टीम ने दो शवों को कब्रों से निकलवाया और एम्स के डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम में दावा किया कि दोनों मृतकों में से एक आसिया का कौमार्य भंग नहीं हुआ था।

फारेंसिक विशेषज्ञों ने दावा किया था कि आसिया की योनि झिल्ली बरकरार थी। उन्होंने इस जानकारी को मुशावरत मजलिस-ए-कमेटी के डॉक्टरों के साथ साझा किया। कमेटी ने इस घटना को लेकर 47 दिन तक आंदोलन चलाया था।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जिन डॉक्टरों ने परीक्षण स्लाइडें तैयार की, उन्होंने बताया कि मृत महिलाओं से पहले कभी कोई नमूना नहीं लिया गया था।

दूसरे पोस्टमार्टम की टीम में शामिल रही पुलवामा जिला अस्पताल की एक डाक्टर से सीबीआई ने पूछताछ की। उसने बताया कि नीलोफर और आसिया का योनि स्राव परीक्षण के लिए कभी लिया ही नहीं गया। डाक्टर पूछताछ में टूट गई और उसने सब कुछ बयान कर दिया।

दो महत्वपूर्ण गवाहों अब्दुल राशिद और जीएम लोन के खिलाफ बयान से मुकरने के लिए आरोप पत्र दायर किया गया है। इन्होंने पहले कहा था कि उन्होंने एक पुलिस वाहन से महिलाओं के चीखने की आवाज सुनी थी, लेकिन दोनों सीबीआई के सामने टूट गए और बताया कि कुछ वकीलों ने ऐसा कहने के लिए उन्हें धन देने तथा उनका व्यवसाय स्थापित कराने में मदद करने की पेशकश की थी।

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