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अब दिसंबर में ही बौराए आम

ग्लोबल वार्मिग का असर आम के पेड़ों पर फिर से पड़ गया है। पिछले साल की तरह इस साल भी आम पर समय से पहले ही बौर आ गया है। जिसका आम उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह गंभीर स्थिति तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने के कारण पैदा हुई है।

प्रकृति से छेड़छाड़ करने का दुष्परिणाम सामने आने लगा है। हर साल आम के पेड़ों पर समय से पहले ही बौर आ रहा है। इस बार भी दिसंबर में ही आम पर बौर आने लगा है। आधा दिसंबर आने के बाद भी अभी तक कड़कड़ाती सर्दी नहीं पड़ी है। इसका वनस्पतियों पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

आमतौर पर फरवरी माह में आम पर बौर आना शुरू होता है। लेकिन मौसम के बदलावों के कारण दिसंबर माह में ही आम के पेड़ों पर बौर आना शुरू हो गया है। जिले के मोदीनगर, मुरादनगर, हापुड़ क्षेत्र में कई जगहों पर आम के पेड़ बौराए हुए हैं।

इससे गाजियाबाद में तीन हजार हेक्टेयर आम के बागों के लिए खतरे की घंटी बज गई है। किसानों का कहना है कि तीन साल से आम के पेड़ों पर असमय बौर आ रहा है जिसका उत्पादन पर बुरा असर होता है।

जिला उद्यान अधिकारी डॉ. धर्मपाल यादव तापमान में बदलावों का दुष्परिणाम बताते हैं। समय से पहले आए बौर को किसानों को तोड़ देना चाहिए।

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