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कोपेनहेगन में खींचतान

दुनिया को बचाने के लिए हो रहे बारह दिन के जलवायु सम्मेलन में छह दिनों की मशक्कत से कुछ निकल नहीं पाया है और अगर आखिरी दिन विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के पहुंचने के बाद भी कोई नाटकीय नतीजा नहीं निकला तो खींचतान के बढ़ते तापमान से उम्मीदों के ग्लेशियर पिघल जाएंगे। शुक्रवार को अस्थायी कार्य समूह के पहले मसविदे को भारत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें यह स्पष्ट नहीं है कि वैश्विक उत्सजर्न कब चरम पर होगा, इसे कम करने के लिए कितना खर्च किया जाएगा और उसका आधार वर्ष क्या होगा। हालांकि यूरोपीय संघ और अमेरिका ने अपने ढंग से कटौती व्यय यानी उपशमन कोष का ऐलान भी किया है पर विकासशील देश उसे नाकाफी मान रहे हैं। भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका देशों के समूह पर इस सम्मेलन की अहम वार्ताओं का दारोमदार है, पर उन्होंने अभी तक अपना कोई मसविदा पेश नहीं किया है। कोई जरूरी भी नहीं कि जल्दी ही पेश होने वाले उनके मसविदे पर विकसित और अविकसित देशों की सहमति ही बन जाए क्योंकि समुद्र में डूबने की आशंका से ग्रसित तमाम द्वीप समूहों वाले देश विकसित देशों की शह पर विकासशील देशों पर अपने ढंग से दबाव डाल रहे हैं। विकसित देशों पर भारी जिम्मेदारी निभाने का दबाव है तो विकासशील देशों की सर्वोच्च प्राथमिकता सामाजिक-आर्थिक विकास और गरीबी उन्मूलन है। अगर देखा जाए तो विकासशील देश सकारात्मक भेदभाव के सिद्धांत के तहत एक तरह का आरक्षण मांग रहे हैं जबकि औद्योगिक देश वह सुविधा देने के बजाय उसे अपने लिए खरीदना चाह रहे हैं। इस बीच अगर वहां जुटे सामाजिक समूह खेती के सवाल को उठा रहे हैं तो वह भी गैर-वाजिब नहीं कहा जा सकता। कुल मिलाकर कोपेनहेगन के महामंथन में जाहिरा तौर पर भारी भ्रम है, लेकिन अच्छी बात यही है कि अपने भीतर चलने वाले पर्यावरण आंदोलनों के चलते क्योटो संधि को दरकिनार कर रहे विकसित देश भी कुछ आकर्षक प्रस्ताव दे रहे हैं।
दूसरी तरफ आशंका के विपरीत भारत और चीन जैसे देश अमेरिकी पाले में गिर नहीं गए हैं, पर कटौती के फामरूले और उसके खर्च उठाने से कम महत्वपूर्ण काम सौर और नाभिकीय ऊर्जा प्रणालियों का अनुसंधान और उसे अपनाया जाना नहीं है, जिससे जलवायु परिवर्तन रुकेगा। इसके लिए महज वैश्वीकरण का नारा ही नहीं उसकी भावना के आगे समर्पण भी करना होगा। रियो से कोपेनहेगन तक धरती ने बीस साल इंतजार किया है, अब और इंतजार करवाना उस पर अन्याय होगा।

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  • Web Title:कोपेनहेगन में खींचतान
पहला एक-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच
इंग्लैंड284/8(50.0)
vs
न्यूजीलैंड287/7(49.2)
न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 3 विकटों से हराया
Sun, 25 Feb 2018 06:30 AM IST
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Sun, 25 Feb 2018 06:30 AM IST
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इंग्लैंड
बे ओवल, माउंट मैंगनुई
Wed, 28 Feb 2018 06:30 AM IST