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विवादास्पद पुस्तक की जलाई होली

वीरांगना लक्ष्मीबाई पर आपत्तिजनक टिप्पणी से आक्रोशित बुमुमो तथा बुंदेली सेना ने लेखक कौशलेंद्र प्रताप यादव का पुतला फूँककर व पुस्तक की होली जलाकर गुस्से का इजहार किया। उन्होंने माँग की कि लेखक और मुद्रक प्रकाशन पर राष्ट्रदोह का मुकदमा चलाया जाए।

प्रकाशित पुस्तक आल्हा ऊदल और बुंदेलखंड में झाँसी की रानी में बारे में की गई टिप्पणी को लेकर बुंदेलियों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। रविवार को बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा तथा बुंदेली सेना के सैकड़ों जवानों ने अशोक लाट पर पुस्तक के लेखक कौशलेंद्र प्रताप यादव का पुतला फूँका और पुस्तक की प्रतियाँ जलाकर गुस्से का इजहार किया।

जिलाध्यक्ष कैप्टन सूर्यप्रकाश मिश्र ने कहा कि लेखक ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर आपित्तजनक टिप्पणी करके बुंदेली अस्मिता पर प्रहार किया है।

उन्होंने कहा कि बुमुमो 16 दिसंबर से 18 दिवसीय पदयात्रा करके चित्रकूट, शिवरामपुर, भरतकूप, बदौसा, अतर्रा, खुरहंड, मटौंध, कबरई, महोबा, खजुराहो में लोगों को जागरूक करेंगे। साथ ही बुंदेली अस्मिता से खिलावाड़ करने वाले लेखक के पुतले और पुस्तक की होली जलवाएंगे।

बाँदा के बुद्धिजीवी वर्ग में खासा रोष है। उनका कहना है कि यह ख्याति पाने का स्टंट है। लेखक का मेडिकल टेस्ट कराते हुए राष्ट्रद्रोह का मुकदमा कायम किया जाना चाहिए। झाँसी की रानी को अंग्रेजों का पक्षधर एवं मंगल पांडे को भंगेड़ी कहने वाला लेखक विक्षिप्त हो गया है।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस कहते हैं कि दुर्भाग्य है कि अभी तक किताब पर बैन नहीं लगाया गया। चित्रकूट में इतिहासकार डॉ कमलेश थापक बोले, रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों से युद्ध पूरे भारत की आजादी के लिए लड़ा। इसके लिए उन्होंने उस समय 42 राजाओं को पत्र भी भेजा जो ब्रिटिश संग्रहालय में सुरक्षित है।

अंग्रेज सरकार ने लक्ष्मीबाई पर दस हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। अंग्रेज अधिकारियों ने लिखा था कि झाँसी की रानी यदि जिंदा कैद कर ली जाती हैं तो उन पर विद्रोह का मुकदमा चलेगा।

इसके अलावा रानी के जेल दरोगा बख्शीस अली, सलाहकार अमर सिंह और उनके पिता मोरो पंत उर्फ मामा साहब के ऊपर दो-दो हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

एक हजार इनाम वालों की सूची में चिकित्सक मोहम्मद सलेह व सलाहकार गंगाधर, लक्ष्मण राव, लल्लू बख्शी और काफी नाम थे।

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