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अफसरों की उदासीनता से ‘फीलगुड’ में ब्लैक मार्केटियर

जन वितरण प्रणाली पर अनुमंडल पदाधिकारियों की रिपोर्ट देखने पर तो यही लगता है कि कम काम पर भी बेहतर परिणाम मिल रहा है। लेकिन रिपोर्ट यह भी साबित करती है कि अफसरों की उदासीनता के कारण ब्लैकमार्केट के खिलाड़ी जबरदस्त ‘फीलगुड’ में हैं। इसी का नतीजा है जहां भी जांच हुई कुछ ना कुछ गड़बड़ी जरूर मिली। 

राज्य के 101 एसडीओ ने मिलकर 4671 दुकानों का निरीक्षण किया जबकि वर्ष 2008 में आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े तमाम तरह के अफसरों ने 53,305 बार दुकानों का निरीक्षण किया था। बिहार में जविप्र दुकानों की संख्या लगभग 43 हजार है। मतलब पिछले वर्ष हरेक दुकान पर कम से कम एक अधिकारी जरूर पहुंचा।

इस वर्ष अप्रैल से नवम्बर के बीच एसडीओ की जांच के आधार पर जन वितरण प्रणाली के 226 दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे हुए और 61 की गिरफ्तारी भी हुई जबकि वर्ष 2008 में जिला से लेकर मार्केटिंग अफसर तक की रिपोर्ट के आधार पर सिर्फ 135 दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे हुए और मात्र 10 की गिरफ्तारी हुई थी। मतलब नियमित जांच की वजह से जविप्र दुकानदारों में खौफ बरकरार था। 

इस वर्ष अररिया, बेगूसराय, अरवल, मुजफ्फरपुर, कटिहार, औरंगाबाद और जमुई के एसडीओ ने ही सौ या उससे अधिक बार जविप्र दुकानों का निरीक्षण किया। दूसरी ओर बलिया के एसडीओ 1, पूर्णिया और नीमचक बथानी के एसडीओ 2-2, हथुआ के एसडीओ 3, पटना के एसडीओ 4, तारापुर के एसडीओ 5 और तेघड़ा व बेलसंड के एसडीओ 6-6 बार जविप्र दुकानों तक पहुंचे। यही वजह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी एसडीओ को जन वितरण प्रणाली पर कड़ी नजर रखने और गड़बड़ी की शिकायत मिलते ही कार्रवाई के निर्देश दिये हैं।

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  • Web Title:अफसरों की उदासीनता से ‘फीलगुड’ में ब्लैक मार्केटियर