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बिहार ने पूर्वी क्षेत्र से उत्तर व दक्षिण के राज्यों को कोयला भेजने का विरोध किया

पूर्वी क्षेत्र के बिजलीघरों में कोयला संकट पर बिहार ने गहरी नाराजगी प्रगट की है। यही नहीं उसने पूर्वी क्षेत्र से उत्तर व दक्षिण क्षेत्रों में कोयला भेजे जाने का विरोध भी किया है।

बिहार ने कहा है कि एक ओर पूर्वी क्षेत्र के बिजलीघरों में कोयला का अभूतपूर्व संकट है जबकि दूसरी ओर यहां से कोयला दूसरे क्षेत्रों के बिजलीघरों में भेजा जा रहा है।

यह इस क्षेत्र के साथ अन्याय है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि पूर्वी क्षेत्र के बिजलीघरों में कोयला संकट के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसका जबरदस्त खामियाजा बिहार भुगत रहा है। 

पिछले दिनों सिक्किम में पूर्वी क्षेत्र के राज्यों की बैठक में यह मामला उठा। बैठक में बिहार के अलावा सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, झारखंड, डीवीसी के अलावा एनटीपीसी, पावरग्रिड, एनएचपीसी के अधिकारी भी मौजूद थे।

केन्द्र के अधिकारियों के साथ कोल कंपनियों ईसीएल, बीसीसीएल, सीसीएल आदि के अधिकारियों ने भी शिकरत की। बिहार का प्रतिनिधित्व बिजली बोर्ड के अध्यक्ष स्वपन मुखर्जी ने की। सिक्किम से लौटने के बाद श्री मुखर्जी ने बताया कि अन्य राज्यों ने भी बिहार की बातों का समर्थन किया।  

बिहार में इस समय दो थर्मल पावर कांटी और बरौनी है जहां ईसीएल और बीसीसीएल से कोयले की आपूर्ति होती है। जबकि एनटीपीसी के तालचर, फरक्का और कहलगांव से भी बिहार को बिजली मिलती है जहां ईसीएलई, बीसीसीएल, सीसीएलई एमसीएल और एनईसी से कोयले की आपूर्ति होती है।

इन तमाम कंपनियों द्वारा कोयले की आपूर्ति में काफी कटौती की गई है जिससे बिजलीघरों की कई इकाइयां बंद रखनी पड़ रही है।

 ‘कोयला संकट के कारण बिजलीघरों में उत्पादन काफी कम हो गया है। मजबूरी में हमें यूआई के तहत महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। इससे हर माह औसतन 10 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। यही नहीं एनटीपीसी आयातित कोयला का उपयोग कर रहा है जिससे विद्युत शुल्क पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। बिहार अबतक इस मद में 300 करोड़ रुपए से अधिक भार वहन कर चुका है।’
 -स्वपन मुखर्जी, अध्यक्ष बिजली बोर्ड

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  • Web Title:उत्तर व दक्षिण को कोयला भेजने का विरोध