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प्रिंसिपल की दिनचर्या से वाकिफ थे हत्यारे

परिस्थिति जनसाक्ष्य गवाह देते हैं कि हत्यारा चाहे जो कोई रहा हो, वह प्रिंसिपल की दिनचर्या से पूरी तरह वाकिफ था। उसे यह भी पता था कि छात्रवस का मेन गेट कब खुलता है और कब बंद होता है। यही वजह है कि हत्यारों ने उन्हें मारने के लिए वही वक्त चुना।

इंस्टीट्यूट के नाइट गार्ड वंशीधर चौधरी के अनुसार रात में खाने के बाद दस बजे हॉस्टल का मेन गेट वह रोज बंद कर देता है। फिर सुबह, अजान के वक्त करीब 5 बजे गेट खोलकर वह सोने के लिए चला जाता है। यह घटना साढ़े पांच बजे की है। इसका मतलब हत्यारे को इस बारे में पूरी तरह पता था।

यह सच हॉस्टल में रहने वाले छात्र एवं स्टाफ ही जानते हैं कि प्रिंसिपल का कमरा अंदर से खुला रहता है। मेन गेट और प्रिंसिपल के कमरे का खुला होना हत्यारे के काम को और आसान कर गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रिंसिपल को गोली लगी, गोली की आवाज भी सुनाई पड़ी पर किसी ने हत्यारे को आते या भागते नहीं देखा।

न तो हॉस्टल के छात्र और न ही स्टाफ इस बात को कबूल कर रहे हैं। इसी छात्रवास में पिछले दो साल से रह रहे इन्स्टीट्यूट के इंस्ट्रुक्टर मो. सगीर अंसारी के अनुसार इस हॉस्टल में करीबन 30 छात्र रहते हैं। इसी के एक कमरे में प्रिंसिपल श्री जसीम, बड़े बाबू गाफिल होदा एवं इंस्ट्रुक्टर रमेश कुमार एक साथ रहते हैं।

घटना की रात प्रिंसिपल अपने कमरे में अकेले सोए थे। अन्य दो में से एक रमेश कुमार पिछले चार दिनों से अवकाश पर हैं जबकि बड़े बाबू गाफिल होदा दिन में आफिस आए थे पर रात में अपने घर अररिया चले गये थे। श्री अंसारी ने बताया कि घटना की रात प्रिंसिपल छात्रों के साथ करीब 8 बजे तक मैच देख रहे थे और खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने के लिए चले गये।

आशंका यह भी जताई जा रही है कि हत्यारे रात में ही अंदर घुसे और सुबह काम तमाम कर चलते बने। लेकिन, इसकी कहीं से कोई पुष्टि नहीं हो पा रही है। नाइट गार्ड की मानें तो घटना की रात यहां कोई बाहरी व्यक्ति नहीं ठहरा था। बहरहाल, पुलिस भी अपनी जांच में इस बात को देख रही है कि प्रिंसिपल की दिनचर्या की जानकारी बाहर के किन-किन लोगों को थी।

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