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इकलौते बेटे की जिंदगी के लिए भटक रहा गरीब

अनेक देवस्थानों में माथा पटकने और तमाम मन्नतों के बाद मिले इकलौते पुत्र को की जिंदगी बचाने के लिए गरीब मजदूर दिलीप कुमार दर-दर भटक रहा है, किन्तु उसे कोई राह नहीं सूझ रही है। जवान होती बेटी के ब्याह की चिंता के साथ बेटे की घातक बीमारी ने पिता को बुरी तरह तोड़ दिया है।

शहर से सटे चौकियां गांव की दलित बस्ती का निवासी दिलीप मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता है। छोटी झाेपड़ी में गुजर-बसर कर रहे दिलीप के परिवार में पत्नी मीना देवी, तीन बेटियां निशा (19), सरोजा (17), रजनी (14) और एकमात्र बेटा आनन्द (7) है।

डाक्टरों के अनुसार आनन्द के दिल का वाल्ब खराब है जिसके इलाज पर लगभग दो लाख रुपये खर्च आयेगा। एक दिहाड़ी मजदूर इतना पैसा कहां से लाये यह उसकी समझ में नहीं आ रहा है।

बेटे को लेकर दिलीप इन दिनों अफसरों व जनप्रतिनिधियों की दहलीज चूम रहा है ताकि कोई उसकी पुकार सुन ले और इकलौते बेटे की जिन्दगी पर गहराते खतरे को टालने में उसकी मदद करे।

अब तक कोई आंसू पोछने वाला नहीं मिला। ‘हिन्दुस्तान’ से अपना दुखड़ा सुनाते हुए दिलीप ने बताया कि बेटे के इलाज के लिए वह लखनऊ तक दौड़ लगा चुका है। डाक्टरों ने वाल्व की खराबी दूर करने के लिए आपरेशन ही एकमात्र रास्ता बताया है और इसके लिए दो लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी।

बेटे के इलाज के साथ जवान होती बेटी के हाथ पीले करने की दोहरी चिंता में गरीब परिवार बेहाल है और उसे भगवान से किसी चमत्कार की उम्मीद है।

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