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पूर्वाचल प्रदेश बनने से होगा काशी का संरक्षणः मनोज तिवारी

पूर्वाचल प्रदेश की आवधारणा लोगों के दिलों में दो दशक पहले ही बननी शुरू गयी थी। तेलगांना प्रदेश की पहल के बाद अब पूर्वाचल राज्य को लेकर चलायी जा रही बहस को तेज कर दिया जाना चाहिए। नया राज्य बनते ही विकास की गति को दिशा मिल जाएगी। लोगों का लगाव बढ़ जाएगा।

परिवार छोटा होने पर नये तरह के विकास शुरू हो जाएंगे। लोगों को अपनी भाषा भोजपुरी को पहचान मिल जायेगी। भारत की सांस्कृतिक नगरी काशी का संरक्षण हो जाएगा। 

भाषाओं को लेकर यहां पहचान का हमेशा संकट रहा है। पंजाबियों के लिए पंजाब, मराठियों के लिए महाराष्ट्र, बंगालियों के लिए बंगाल जैसे प्रदेशों का बोलबाला रहा, लेकिन बड़ी भाषा भोजपुरी का कोई अस्तित्व कभी नहीं दिखा। यदि पूर्वाचल प्रदेश बनता है तो सबसे पहले भोजपुरी की पहचान स्थापित होगी। वर्तमान समय में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या काफी अधिक है।

उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से को हमेशा हाशिये पर रखा गया। हर व्यक्ति अपने दिये हुए राजस्व से विकास चाहता है। केन्द्र से जो भी सहायता मिलती है वह भेदभाव की भेंट चढ़ जाता था। पूर्वाचल राज्य का गठन होते ही यह भेदभाव खत्म होगा और लोगों की सोच विकास की ओर होगी।

यहां उद्योग लगेंगे तो पलायन भी यहां से रुकेगा। सबसे अधिक फायदा यह होगा कि देश की सांस्कृतिक नगरी काशी सुरक्षित होगी। यह कहने में जरा भी संकोच नहीं कि इस नगरी जैसा कोई शहर नहीं।

वर्ष 1996 में कल्पनाथ राय ने पूर्वाचल प्रदेश की आवाज तेज की थी उस समय मैंने गाया था ‘कल्पनाथ के मुंख से निकसल विश्वनाथ की बानी, पूर्वाचल अब राज्य बनी काशी एकरा राजधानी’। राज्यों के अलग होने से यह बात अक्सर उठती है कि विकास नहीं हो सकेगा लेकिन बिहार प्रदेश इसका उदाहरण है।

झारखंड बनते ही दोनों राज्यों का विकास पहले की तुलना में अधिक हुआ। पूर्वाचल राज्य को लेकर असहमति भी बन सकती है लेकिन यह झगड़ा नहीं होना चाहिए कि नाम क्या हो। पूर्वाचल बना तो निश्चित तौर पर भोजपुरी व अवधी का संगम होगा।

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