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उत्तराखण्ड में सरकारी इलाज होगा मंहगा

गम्भीर आर्थिक संकट का सामना कर रही उत्तराखण्ड की सरकार आने वाले समय में नए करों की तैयारी कर रही है। इन प्रयासों के तहत चिकित्सा जैसी सरकारी सेवाएं महंगी होने की पूरी आशंका है।

राज्य सरकार के वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार वित्तीय संकट से निपटने के लिए राज्य में मुख्य स्रोत पर कर और राजस्व में वृद्धि करने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए विभाग को वर्ष 2010-11 के बजट बनाने से पूर्व करेत्तर राजस्व में वृद्धि पर विचार करने का सुझाव दिया गया है।

सेवाओं पर शुल्क की दरों पर वृद्धि के सुझाव पर अमल हुआ तो अगले वित्तीय वर्ष में सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली सुविधाएं महंगी हो जाएंगी। सूत्र कहते हैं कि अधिकांश विभागों में कर एवं करेत्तर राजस्व की दरों को लंबे समय से पुनरीक्षित नहीं किया गया है।

विभागों के बढ़ते खर्च एवं छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर दिए जाने से व्यय में वृद्धि को यान में रखते हुए कर एवं करेत्तर राजस्व में वद्धि करने का पूर्ण औचित्य है।

इसलिए सभी विभागों से वर्ष 2008-09 एवं चालू वित्तीय वर्ष में विगत 30 सितंबर तक प्राप्त राजस्व एवं वृद्धि की सूचना 31 दिसंबर तक वित्त विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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