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अवैध हिरासत मामले में पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा की अनुमति

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखने और उसे यातना देने के मामले में चार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने और जांच शुरू करने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति मूल चंद गर्ग ने पुलिस अधिकारियों को कोई राहत देने से इंकार कर दिया जिन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।

अदालत ने इन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। मजिस्ट्रेट विनय सिंघल ने नीरज मिश्रा नाम के व्यक्ति की कथित अवैध हिरासत और उसे प्रताडित किए जाने के मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा (जो एसीपी रैंक से कम का न हो) शालीमार बाग के तत्कालीन एसीपी, मॉडल टाउन के एसीपी (पीजी) तथा उत्तर-पश्चिम के डीसीपी के खिलाफ जांच कराए जाने का आदेश दिया था।

शिकायतकर्ता मिश्रा ने आरोप लगाया था कि मुखर्जी नगर थाने के तत्कालीन निरीक्षक मोहन सिंह रावत ने अवैध संतुष्टि की मांग की और जब वह सात सितंबर 2007 को रिपोर्ट लिखाने गया तो उसने गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। जब मामला मॉडल टाउन के एसीपी के संज्ञान में आया तो मिश्रा को अदालत जाने की सलाह दी गई। हालांकि, मिश्रा ने एसीपी को शिकायत दर्ज करा दी। इस पर रावत ने उसे पुलिस स्टेशन बुलाया और कथित रूप से उसकी पिटाई की तथा उसकी जेब में रखे 12 हजार रुपए निकाल लिए।

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