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छोटे राज्यों पर जन इच्छा को तवज्जो मिलेः कलाम

छोटे राज्यों पर जन इच्छा को तवज्जो मिलेः कलाम

देश में तेलंगाना समेत अलग-अलग छोटे राज्य बनाने की मांग पर जबर्दस्त सियासी उठापटक के बीच, पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा है कि इस मामले में क्षेत्रीय जनता की इच्छा समझी जानी चाहिए और उसे महत्व दिया जाना चाहिए।

कलाम ने इंदौर के भारतीय प्रबंधन संस्थान में शनिवार रात अपने एक व्याख्यान से पहले संवाददाताओं से कहा, जब तक राज्य आर्थिक रूप से विकसित नहीं होंगे, समूचे देश की तरक्की नहीं होगी। मेरी भावना है कि यह संबंधित क्षेत्र की जनता को तय करने देना चाहिए कि उसके लिए क्या भला है।

तेलंगाना जैसे नए राज्यों की मांग के सवाल पर पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे लिए हालांकि यह कहना काफी मुश्किल है कि फलां राज्य का गठन होना चाहिए या नहीं। पर मुझे लगता है कि हमें इस मामले में देखना चाहिए कि संबंधित क्षेत्र की जनता की इच्छा क्या है। हमें जनता की इच्छा को महत्व देना चाहिए।

कलाम मानते हैं कि अगर राजनीतिक राजनीति के बजाय विकास की राजनीति की जाए तो वह आम जनता के लिए ज्यादा उपयोगी होगी। उन्होंने कहा, देश के सियासी परिदृश्य पर इन दिनों कई युवा नेता उभर रहे हैं। मैं चाहता हूं कि अब पूरा राजनीतिक तंत्र विकास की राजनीति की ओर मुड़ जाये।

कलाम ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी के चलते देश में विकास की रफ्तार कुछ धीमी जरूर पड़ी है। लेकिन हालात लगातार बेहतर होते दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, अगर हम अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर को बढ़ाकर दस प्रतिशत के स्तर तक ले जाते हैं और उसे इस स्तर पर अगले दस साल तक बरकरार रखते हैं तो मिशन 2020 पूरा होगा। नतीजतन देश आर्थिक रूप से विकसित मुल्क के रूप में उभरेगा।

डेनमार्क की राजधानी कोपनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर जारी शिखर सम्मेलन के दौरान विकसित और विकासशील देशों के बीच गहराये मतभेदों पर कलाम ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया की समस्या है। इंदौर हो या तोक्यो, कार हर जगह धुआं छोड़ती है।

मिसाइलमैन ने कहा कि विश्व भर में हर साल करोड़ों टन कार्बन डाइ ऑक्साइड का उत्सर्जन हो रहा है। इसे कम करने के लिए जल्द से जल्द सौर उर्जा और जैव ईंधन जैसे नए स्त्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई जानी चाहिए।

कलाम ने जोर देकर कहा कि भारत के पास सौर उर्जा पर ठोस नीति है। उन्होंने कहा कि देश ने वर्ष 2020 तक सौर उर्जा के उत्पादन को बढ़ाकर बीस हजार मेगावॉट करने का लक्ष्य रखा है।

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