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नदी जोड़ने की परियोजना से पन्ना बाघ अभ्यारण्य होगा प्रभावित!

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच केन-बेतवा नदियों को जोड़ने की परियोजना से पन्ना बाघ अभ्यारण्य प्रभावित हो सकता है।

पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने हाल ही में इस बारे में कहा कि मुझे यह जानकर धक्का लगा कि अभी तक जिस एकमात्र परियोजना, केन-बेतवा पर काम आगे बढ़ा है, उसमें पन्ना बाघ अभ्यारण्य भी शामिल है।

केन-बेतवा परियोजना के तहत केन से बेतवा में 231 किलोमीटर की नहर द्वारा पानी स्थानांतरित किया जाएगा। नहर का सिर्फ 18 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में होगा।

मंत्री का यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है, जब मंत्रालय अदाणी पॉवर लिमिटेड और महाराष्ट्र कोल कंपनी द्वारा कोयला खनन प्रस्तावों पर आपत्ति उठा चुका है। दोनों परियोजनाएं महाराष्ट्र के तादोबा बाघ अभ्यारण्य के पास स्थित हैं।

रमेश ने कहा कि मैं पूर्व में ही महाराष्ट्र के तादोबा बाघ अभ्यारण्य के पास दो खनन परियोजनाओं पर आपत्ति उठा चुका हूं। नदी जोड़ने की परियोजना से पन्ना बाघ अभ्यारण्य का कम से कम 140 हेक्टेयर क्षेत्र पानी में डूब जाने की आशंका है।

वन्यजीव विशेषज्ञ पीके सेन ने कहा कि पन्ना वन्यजीव अभ्यारण्य की भूमि के कुछ हिस्से को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव पर्यावरण मंत्रालय के सामने रखा जाना है, लेकिन वन्यजीवों के आवास को खतरे को देखते हुए इस पर किसी भी कीमत पर हामी नहीं भरी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में इस परियोजना के कारण लगभग 8,650 हेक्टेयर भूमि डूबने की आशंका है, जिसमें लगभग 6,400 हेक्टेयर वन भूमि और शेष 2,171 हेक्टेयर भूमि कृषि योग्य है। इसमें से कुछ भूमि पन्ना अभ्यारण्य की भी है।

केन यमुना की सहायक नदी है। इसका 87 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश में और 12 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में आता है। यमुना की ही सहायक नदी बेतवा का उदगम मध्य प्रदेश के रायसेन से होता है।

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  • Web Title:नदी जोड़ने की परियोजना से पन्ना बाघ अभ्यारण्य होगा प्रभावित!