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सप्ताह के व्रत-त्योहार (13 से 19 दिसम्बर, 2009)

13 दिसम्बर (रविवार) को प्रदोष व्रत है।
प्रदोष व्रत : जो मनुष्य प्रदोष के समय भगवान शंकर जी के चरण कमल का अनन्य मन से आश्रय लेते हैं उनके धन-धान्य, स्त्री-पुत्र-बन्धु-बान्धव और सुख-सम्पत्ति सदैव बढ़ते रहते हैं।
14 दिसम्बर (सोमवार) को मास शिवरात्रि व्रत है।
मास शिवरात्रि : इस दिन उपवास रख कर भगवान शिव की बिल्व-पत्तियों से पूजा की जाती है और रात्रि भर जागरण किया  जाता है। यह व्रत करने से शिव नरक से बचाते हैं और आनन्द व मोक्ष प्रदान करते हैं।
15 दिसम्बर (मंगलवार) को सूर्य मूल नक्षत्र में एवं सूर्य की धनु संक्रांति रात्रि 1 बजकर 56 मिनट पर। धनु (खर) मासारम्भ। पुण्यकाल अगले दिन।
16 दिसम्बर (बुधवार) को स्नान-दान-श्रद्धादि की कुहू अमावस्या। बकुला अमावस्या (उड़ीसा)। कपिला धारा तीर्थ। श्रद्ध। संक्रान्ति का विशेष पुण्यकाल सूर्योदय से प्रात: 8 बजकर 18 मिनट तक। इस दिन वस्त्रदान एवं नदियों में स्नान करना चाहिए।
17 दिसम्बर (बृहस्पतिवार) को पौष मास शुक्ल पक्षारम्भ। सौर (धनु) पौष मासारम्भ।
18 दिसम्बर (शुक्रवार) चंद्रदर्शन। आरोग्य व्रत।
आरोग्य व्रत : यह व्रत करने से रोगों की निवृत्ति और आरोग्यता की प्रवृत्ति होती है तथा सब प्रकार के सुख
मिलते हैं।
19 दिसम्बर (शनिवार) को हिजरी सन् 1931 प्रारम्भ।

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