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प्यार से नहीं डंडे से दंडवत हुए ‘सुपुत्र’

चार बेटों की एक वृद्ध मां को गुजाराभत्ता पाने के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी। मां को न सिर्फ अपना पेट भरने की चिंता थी बल्कि जवान बेटी के लालन-पालन एवं उसकी शादी की जिम्मेदारी ने वृद्धा को अदालत जाने पर मजबूर किया। मामला कड़कड़डूमा स्थित मध्यस्थता केन्द्र पहुंचा।

जहां चारों बेटों ने मध्यस्थता अधिकारी के समक्ष मां को छह हजार रुपये प्रतिमाह गुजाराभत्ता देने पर हामी भर दी। हालांकि मध्यस्थता अधिकारी ने बेटों को चेताया है कि यदि उनमें से किसी ने सभी गुजाराभत्ता अदायगी में देरी की, तो उन्हें गुजाराभत्ते पर 15 प्रतिशत ब्याज की अतिरिक्त अदायगी भी करनी पड़ेगी।

दयानन्द विहार निवासी भजन कौर(56) ने अपने बेटों कैलाश चन्द, बुद्ध प्रकाश, महेन्द्र पाल और गजेन्द्र सिंह से गुजारभत्ते की मांग के साथ अदालत में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता एक विधवा महिला है। उसके चार बेटे उससे अलग रहते हैं। जबकि एक जवान अविवाहित बेटी महिला के साथ रहती है।

अच्छी तरह से गुजर-बसर कर रहे बेटे मां और बहन की आर्थिक मदद नहीं कर रहे हैं। जिससे ये मां-बेटी पाई-पाई को मोहताज हैं। कड़कड़डूमा स्थित एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट राकेश पंड़ित की अदालत ने मां व बेटों के बीच समझौता होने की संभावना के मद्देनजर याचिका को मध्यस्थता केन्द्र में सुलह के लिए भेज दिया था।

जहां प्रतिवादी पक्ष के वकील एन के सिंह भदौरिया और मनीष भदौरिया ने सुलह की पहल करते हुए बेटों की और से गुजाराभत्ता देने पर सहमति जताई। मध्यस्थता अधिकारी ने इस मामले में चारों बेटों को प्रतिमाह अपनी मां को 15-15 सौ रुपये गुजाराभत्ता देने के निर्देश दिए हैं। चारों बेटे कुल 6 हजार रुपये अपनी मां को अदा करेंगे।

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  • Web Title:प्यार से नहीं डंडे से दंडवत हुए ‘सुपुत्र’