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महिलाओं के लिए मिसाल हैं मलर

महिलाओं के लिए मिसाल पटना की पहली महिला एसएसपी आर मलर विलि का मानना है कि माता-पिता बेटे की तरह ही अगर बेटियों को भी प्यार व उच्च शिक्षा दें तो महिलाएं स्वर्णिम मुकाम तक पहुंच सकती हैं। भारत में लोग प्रारंभ से ही बेटियों को पराया धन मानने लगते हैं जो गलत है। इससे बचपन से ही लड़कियां कुंठा का शिकार हो जाती हैं। 1बैच की इस महिला आईपीएस अधिकारी का मानना है कि लड़कियों को तबतक पढ़ना चाहिए जबतक वे अपने पांव पर खड़ी नहीं हो जातीं तथा उस समय तक उनकी शादी नहीं करनी चाहिए। मध्यमवर्गीय परिवार की पुत्री मलर बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि की थीं। वे मूल रूप से मदुरई (तमिलनाडु) की निवासी हैं। आर्मी मैन पिता की इतनी आय नहीं थी कि वह तीन बेटियों और दो बेटों वाले परिवार को उच्च शिक्षा दिलाते।ड्ढr ड्ढr पारिवारिक हालत को देखने के बाद भी विलि ने हालात से समझौता करने के बजाए लड़ने की ठानी। विलि कहती हैं कि ‘मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं, वह उसका निर्माता, नियंत्रणकर्ता और स्वामी है’ के सूत्र को याद कर अपनी पढ़ाई जारी रखी। कम आय के बावजूद माता-पिता का सपोर्ट मिला और वह इस मुकाम पर पहुंची। आईपीएस बनने के दो वर्ष बाद विलि ने महिलाओं के लिए तब एक और आदर्श स्थापित किया जब बैचमेट और बिहार कैडर के ही तमिलनाडु निवासी आईपीएस अधिकारी रविन्द्रण शंकरण से अंतराातीय विवाह किया। शुरू में इनके पैरन्ट्स ने विलि के इस निर्णय का विरोध किया पर बाद में बेटी की खुशी के आगे वे भी नतमस्तक हो गए। पति के दूसर जिले में पदस्थापना के बावजूद दो बच्चियों की मां मलर स्वेच्छा से आयीं इस पेशे को अपना सबकुछ मानती हैं। कभी-कभी पति की दूरी खटकती अवश्य है पर वह कार्य को ज्यादा महत्वपूर्ण मानती हैं। अपराध और अपराधियों के लिए सख्त माने जाने वाली विलि की दोनों बेटियां अपनी दादी के साथ कभी पापा तो कभी मम्मी के पास रहती हैं। पति-पत्नी ने यह निर्णय लिया कि जिसके पदस्थापन वाले जिले में पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था होगी बेटियां वहीं रहेंगी। तमिलनाडु की होने के बावजूद शुद्ध तथा फर्राटे से हिन्दी बोलने वाली विलि कहती हैं कि बिहार में ही उन्होंने हिन्दी सीखी।

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  • Web Title: महिलाओं के लिए मिसाल हैं मलर