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भारत सालाना कटौती की अवधारणा पर नहीं होगा राजी: रमेश

भारत सालाना कटौती की अवधारणा पर नहीं होगा राजी: रमेश

पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि भारत सालाना आधार पर कटौती की अवधारणा पर सहमत नहीं होगा, क्योंकि देश में ग्रामीण विद्युत विस्तार के विकास का बहुत सारा काम शेष है। उन्होंने पहले उल्लेखित रेड लाइन्स पर समझौते की संभावना से इनकार किया।

कोपनहेगन जलवायु परिवर्तन सम्मेलन के पहले दिन रमेश ने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के भारत के स्वैच्छिक घरेलू कदम अंतरराष्ट्रीय निगरानी के लिए नहीं हैं और इन कदमों की जांच देश की संसद द्वारा की जाएगी।

रमेश ने कहा कि भारत यहां कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते की सुगमता के लिए है और वह यहां रचनात्मक, सुगम तथा नेतृत्वकारी भूमिका अदा करने आया है, ताकि एक प्रभावी और निष्पक्ष समझौता सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि लेकिन साथ ही हम भारत के लिए सालाना कटौती की अवधारणा पर रजामंद नहीं होंगे, क्योंकि भारत के पास विकास का, खासकर ग्रामीण बिजली आपूर्ति विस्तार के क्षेत्र में काफी काम बचा है। मंत्री ने कहा कि भारत न सिर्फ स्वैच्छिक रूप से 2020 तक 20.25 प्रतिशत उत्सर्जन कटौती की बात कर रहा है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह कटौती परिणाम भी अपना रहा है। इसका मतलब यह है कि इन घरेलू कदमों पर कार्यान्वयन और प्रगति की जांच संसद, मीडिया और नागरिकों द्वारा की जाएगी।

रमेश ने कहा कि धरती पर भारत जैसा कोई और स्थान नहीं है जहां बहुत बड़े स्तर पर घरेलू एमआरवी मॉनिटरिंग, रिपोर्टिंग, वेरिफकेशन होता होता हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद द्वारा समर्थित सभी कार्रवाई एमआरवी से संबंधित हैं जबकि बिना समर्थन वाली कार्रवाई विशिष्ट तौर पर भारत का काम है। भारतीय मंत्री ने एक दिन सीओपी-15 बैठक में अपने समकक्षों के साथ गुजारा। रमेश ने यहां पत्रकारों को बताया कि उनकी चर्चा विभिन्न मसौदों पर केंद्रित थी।

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