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हमारे पा अफ्रीकी चीनियों के पा हम

हमारे पा अफ्रीकी चीनियों के पा हम

हम भारतीय हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि हमारे आदि पूर्वज भारत में कब और कहां से आए होंगे? फिर हमारा अपने पड़ोसी देशों चीन, जापान, इंडोनेशिया आदि के लोगों से भी क्या कोई रिश्ता है?

इन तथ्यों को लेकर पूर्व में पश्चिमी देशों के वैज्ञानिकों ने जो थ्योरी पेश की थी उसे खारिज करते हुए एक बड़े शोध में दावा किया गया है कि एक लाख वर्ष पहले अफ्रीका से सबसे पहले इंसान समुद्र के किनारे-किनारे चलते हुए भारत पहुंचे थे और फिर भारत से वे दक्षिण और पूर्व एशिया में पहुंचे। जबकि पश्चिमी थ्योरी अफ्रीका से इंसान के मध्य एशिया पहुंचने और फिर वहां से भारत पहुंचने की बात कहती है।

विज्ञान मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण और सीएसआईआर के महानिदेशक समीर. के. ब्रह्मचारी ने विश्व के दस एशियाई देशों के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध की रपट जारी करते हुए कहा, ‘एशिया में इंसान के कदम भारत से ही पड़े। इस हिसाब से एशियाई देशों में मानव विकास का इतिहास सबसे पुराना भारत में है।’ शोध में शामिल इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के निदेशक राजेश गोखले ने कहा कि यह शोध साबित करता है कि अफ्रीकी लोग हमारे पूर्वज थे, क्योंकि वहां मानव विकास का इतिहास एक लाख 30 हजार साल पुराना है। इस प्रकार हम चीन, जापान, कोरिया, कजाकिस्तान समेत तमाम एशियाई देशों के पूर्वज हैं।

इस शोध का उपयोग क्या है?: वैज्ञानिकों के अनुसार, इस शोध का उपयोग भविष्य की चिकित्सा के लिए होगा। मसलन, भारत लगभग समूचे एशिया का पूर्वज है। इसका मतलब यह हुआ कि एशियाई देशों के लोगों का जेनेटिक बैकग्राउंड भारतीयों के करीब है। यदि भारतीयों पर किसी दवा का परीक्षण सफल रहता है तो वह दवा पूरे एशियाई लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। भविष्य में एशियाई लोगों के लिए भारत दवा परीक्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है।

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