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टीम वर्क

उस दिन क्रिकेट में टीम इंडिया नंबर वन हो गई। बहुत देर तक टीवी पर टीम का जश्न देखता रहा। उस बीच न जाने कितनी बार टीम वर्क का जिक्र आया। वह सब खत्म होने के बाद अनायास मैं चिन्मय मिशन के स्वामी ब्रह्मानंद जी की गाई एक शांति प्रार्थना गुनगुनाने लगा। यह प्रार्थना कठोपनिषद् में आई है। कई और उपनिषदों में भी उसे देख सकते हैं।
‘ओम् सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यम् करवावहै। तेजस्वि नावधीतमस्तु। मा विद्विषावहै।। ओम् शांति: शांति: शांति:।’
विनोबाजी ने उसका अर्थ किया है ओम् (परमात्मा) हमारा (गुरु शिष्यों का) एकत्र विकास करे। हमारा एकत्र रक्षण करे। हम एकत्र पराक्रम करें। हमारा अध्ययन तेजस्वी हो। हम एक दूसरे से द्वेष न करें।
 
हालांकि एक दौर में यह गुरुकुल को ध्यान में रख कर लिखी गई थी। लेकिन मेरे लिए तो यह अपनी टीम के लिए प्रभु से प्रार्थना है। हे प्रभु, हम जो भी काम करें, उसे एकजुट हो कर करें। प्रभु हम सबका एक साथ विकास करें। उसमें महज लीडर नहीं है। उसमें सभी शामिल हैं। अपने समूह के एक-एक जन के विकास की प्रार्थना है यह। प्रभु हम सबकी रक्षा करें। वही तो हम सब के पालनहार हैं। हम सब मिल कर काम करें। 

जोरदार काम करें। हमारे काम में तेज दिखलाई पड़े। हम सभी तेजस्वी हों। अपनी पूरी ऊर्जा के साथ काम करें। आखिर में कमाल की बात। हम सब मिल कर काम तो करें। लेकिन एक-दूसरे से झगडें नहीं। हमें एक-दूसरे को लेकर कोई ईष्र्या या जलन न हो। हम शांत हो कर सब कुछ करें। और हमारे जीवन में शांति हो।  असल में सब कुछ के बावजूद जिंदगी जीने के लिए एक शांत मन की जरूरत होती है। जिंदगी में शांति की दरकार होती है। अपने ऋषियों ने मनुष्य के उस शांत भाव पर बहुत जोर दिया है। शायद इसीलिए अपने यहां कमाल की शांति प्रार्थनाएं रची गई हैं।

कुल मिला कर प्रभु से प्रार्थना है कि हम सबका खयाल रखो। हम सबको साथ मिल कर रहने और काम करने की शक्ति दो। तभी तो व्यक्ति के साथ-साथ समाज का भी विकास होगा। मिल कर रहने से समाज बनता है। मिल कर काम करने से हमारी दुनिया आगे बढ़ती है।

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