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तुम जियो हजारों साल, लेकिन

अचानक एक चीख से आंख खुली। थोड़ी देर तो कुछ समझ नहीं आया कि कोन गिर पड़ा? किसे चोट लगी? पर थोड़ी ही देर में समझ आ गया बारह बज रहा है किसी का जन्म दिन मनाया जा रहा है। मुस्करा उठी इस लड़की के पैदा होने में क्या इतना शोर शराबा हुआ होगा। हो सकता है सिजेरियन रहा हो? इतना शोर था सभी निशाचरों की तरह चिल्ला रहे थे बिना इसकी वरवाह किए कि आस पास के कई लोग सो रहे हैं। इसके बाद आयोजन शुरू हुआ। छत पर ऐसा लग रहा था कि कहीं आर्मी आ रही है। वीडियो फिल्म बन रही थी। दो घंटे शोर रहा। करीब 3 बजे जाकर आंख लगी। सुबह पूछने पर पता चला कि पहले कैमरे ने काम करना ही बंद कर दिया कि न जाने क्या हुआ इसलिए दुबारा डांस करना पड़ा। इसलिए इतनी देर हो गई। ये कहां की सभ्यता है कि आधी रात को गुब्बारे फोड़ना तथा बर्थ डे गर्ल के चेहरे पर इतना केक पोतना कि उसे मुंह धोना पड़े।
डॉ. नीतू मिश्र, वनस्थली, टोंक

ईमानदारी से लागू भी करें
हमारी पुलिस और हमारे नेता अदालतों के अच्छे आदेशों पर पानी फेर देते हैं। आप चाहें पुरानी दिल्ली स्टेशन के इलाके में जाएं, या आजाद मार्केट, किशनगंज या इंदरनगर, मोती नगर या रमेश नगर, राजा गार्डन या उत्तम नगर, हर जगह आपको फुटपाथ पर बने मंदिर या मस्जिद वगैरह मिल जाएंगे। ये धार्मिक स्थान पैदल चलने वालों पर जुर्म की तरह हैं। प्रशासन अगर सख्ती बरते तो ये सब और नहीं बनेंगे। साथ ही मडिया को गिनकर इनकी संख्या और लोकेशन छापनी चाहिए, ताकि कोई नया बने तो पकड़ा जाए।
अशोक गुप्ता दाड़ीवाला, सदर बाजार, दिल्ली-6

जंतर मंतर ही सबसे अच्छा
दिल्ली में धरने प्रदर्शन के लिए जंतर मंतर ही सबस अच्छा मंच हैं। यहां समीप ही चर्च, मंदिर, गुरुद्वारा, मस्जिद हैं। जनसुविधाएं पोस्टआफिस वगैर हैं। पेट पूजा के लिए रेस्तरां, ढाबे और लंगर वगैरह भी हैं। गड़बड़ी से निपटन के लिए थाना भी पास है। इससे अच्छा जगह और कौन सी हो सकती है। जाम तो पूरी दिल्ली में वैसे ही लगते रहते हैं। जगर बदलने से जाम से छुटकारा नहीं मिलेगा।
राजेंद्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली

मिड डे मील
फरजाना
चाहे भूखी रह जाना
परंतु कभी
मिड डे मील मत खाना।
आकाश सोलंकी, यमुना विहार, दिल्ली- 53

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