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फिर लाएंगी बहारें छोटी छोटी कारें

कार उपभोक्ताओं के लिए इससे बेहतर समय पहले नहीं रहा होगा और हां, आगे तो स्थितियों में और सुधार होने वाला है। बाजार में कारों के बड़ी संख्या में आने वाले मॉडलों ने लोगों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। लोग पसोपेश में हैं कि आखिर किस कार को चुना जाए। हम यहां बाजार में आने वाली कुछ किफायती और उम्दा कारों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। कंज्यूमर के लिए यहां सबसे फायदे वाली बात ये है कि बाजार में जितनी ज्यादा प्रतिस्पर्धा होगी, डील उतनी ही बेहतर होगी।

इन कारों को ध्यान में रखकर बनाया गया है कि इनकी लंबाई 4 मीटर से ज्यादा न हो जिससे एक्साइज डय़ूटी कम हो। साथ ही वाजिब कीमतें तो लोगों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं। इसका मतलब ये भी है कि पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा छोटे इंजनों संबंधी स्थापित दिशानिर्देशों के अनुसार (2006 में उन्होंने पारिभाषित छोटी कारों पर एक्साइज डय़ूटी में कटौती की थी - कार जिसकी लंबाई 4 मीटर से ज्यादा न हो और पेट्रोल इंजन की क्षमता 1200 सीसी से ज्यादा न हो और डीजल मॉडल के लिए यह सीमा 1500 सीसी है)। लेकिन फिर भी उम्मीद रखें कि बिक्री होगी। और हां, शुरु  में मारुति सुजुकी स्विफ्ट पर जरूर कुछ असर पड़ेगा। 

उसकी जैसी रिट्ज और हुंडई की बेस्टसेलर आई-10 और आई-20 के कारण। जहां तक छोटी कारों की बात है तो मैं आपको फिर ध्यान दिला दूं कि जापान की बड़ी कंपनी टोयोटा अपने स्मॉल कार कांसेप्ट को भारत में जनवरी में होने वाले ऑटो एक्सपो में प्रदर्शित करने जा रही है। कार का प्रोडक्शन और मार्केट में प्रवेश 2010 में होगा। उम्मीद है कि होंडा की छोटी कार भी बाजार में छाने को तैयार है। दोनों ही कारें एक ही कीमतों वाली हैं और हां, सबसे प्रमुख दोनों का उपभोक्ता भी समान है।

निसान माइक्रा
यह एक ऐसी कार है जो सिर्फ भारत के लिहाज से ही विशेष तौर पर नहीं बनाई गई है। निसान माइक्रा चेन्नई की कंपनी में बनेगी। भारत में बेचे जाने के अलावा इसका आयात यूरोप और दुनिया भर के अन्य देशों से किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि माइक्रा रूमी होगी। इसका इंटीरियर और स्टाइल युवा उपभोक्ताओं को लुभाएगा। निसान अपने डीलर के नेटवर्क का विस्तार करने में लगी है। पहले ही दिन से इसका लक्ष्य है कि इसमें लोकल कंटेंट की मात्र ज्यादा है - तकरीबन 80 प्रतिशत तक।
संभावित कीमत : 4 से 5.5 लाख
लांच : मार्च

फॉक्सवेगन पोलो
इस मॉडल के बारे में काफी जिक्र हो चुका है और इसने फॉक्सवेगन की काफिले में एक प्रमुख जगह बना ली है। फॉक्सवेगन का दावा है कि यह कार भारत में बतौर ब्रेक मॉडल के तौर पर लांच की गई है। भारत में फॉक्सवेगन ब्रांड की कारें दिखने लगी हैं और बीटल और टाउरेग मॉडल लांच किए जा चुके हैं। ये सब पोलो के लिए एक बढ़िया शगुन है। पोलो यहां जनवरी में आटो एक्सपो में दिखाई देगी, लेकिन रोड में आपको ये वित्तीय वर्ष (मार्च 2010) के अंत में दिखाई देगी। यह कार पेट्रोल और डीजल इंजन के विकल्प के तौर पर उपलब्ध होगी। इसका ट्रांसमिशन मैनुअल होगा और इंटीरियर इक्विपमेंट  लाजवाब। अगर फॉक्सवेगन बेहतरीन क्वालिटी वाले मैटीरियल और कीमतों को बरकरार नहीं रख पाती है तो उसे इस बात के प्रति आश्वस्त करना होगा कि यूरोप में बिकने वाली कार का ये कमजोर वजर्न न हो। इस कार का लोग बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
संभावित कीमत : 4 से 6 लाख
लांच : मार्च

फोर्ड फीगो
आखिर क्यों फोक्सवेगन पोलो कंपनी के लिए एक जुए की तरह है। इसका एक कारण ये है कि उसकी स्वयं की स्थापित कंपनी स्कोडा फोबिया और तमाम अन्य कंपनियां जो बाजार में प्रवेश करने वाली हैं, उससे उन्हें कड़ी चुनौती मिलेगी। आप फोर्ड फीगो में प्रवेश करें। यह अमेरिकी कार निर्माता की भारत में एक बड़ी लांच है। मैंने इस कार को देखा है और जहां तक इसके स्टाइल, आकार और शेप की बात है तो वाकई ये बेहतरीन है। लेकिन जो बात अब तक नहीं जानते वो ये कि इस कार के इंजन का स्पेसिफिकेशन क्या हैं और इसके आंतरिक इक्विपमेंट कौन से हैं। फोर्ड का दावा है कि इसके इंटीरियर आपने इस सेगमेंट में कभी नहीं देखे होंगे और बाजार में इसकी कीमतें प्रतिस्पर्धात्मक भी होंगी।
संभावित कीमत : 3.75 से 6 लाख
लांच : तकरीबन मार्च में

शेवरले बीट
नई कारों की एग्रसिव थीम को जेहन में रखते हुए शेवरले बीट पर गौर करें। यह अन्य कारों की तुलना में जरा छोटी है। बीट एक तरह से स्पार्क का रिप्लेसमेंट है। जनरल मोटर्स स्मार्ट तरीके से काम कर रहा है। वह सफल स्पार्क को प्रवेश के दौरान बरकरार रख रहा है। बीट का इंजन 1.2 लीटर का है जिसमें 5 स्पीड मैनुअल गियर बॉक्स लगा हुआ है। इसकी ड्राइविंग बढ़िया है। इसका गियरशिफ्ट वी-शेप का है और दिखने में यह आकर्षक है, खासकर पीछे से। इसमें क्लाइमेट कंट्रोल और इन-डेश म्यूजिक सिस्टम लगा हुआ है जो उपभोक्ताओं को आकर्षित करेगा। कीमत के लिहाज से कार दिखने में आकर्षक है। इसमें कीलैस एंट्री या इलेक्ट्रिक मिरर जैसे फीचरों को शामिल नहीं किया गया है। इसका मतलब ये है कि हम वाजिब कीमतों वाली कार की उम्मीद कर सकते हैं।
संभावित कीमत : 3.5 से 4.5 लाख
लांच : 4 जनवरी

ऑल्टो का विकल्प भी
फॉक्सवेगन-सुजुकी मिलकर भारत में एक नई छोटी कार लाने जा रहे हैं जिसकी कीमत दो-ढाई लाख के बीच होगी। यह कार सुजुकी की बाजार में मौजूद आल्टो के विकल्प के तौर पर उतारी जाएगी। इस बुधवार को घोषित फॉक्सवेगन और सुजुकी के बीच इस अनुबंध के तहत छोटी कारें और बिजली से चलने वाले वाहनों का निर्माण किया जाएगा। छोटी नई कार की यूरोपियन मार्किट में कीमत 4 से 5 हजार डॉलर तक होगी और यह फॉक्सवेगन द्वारा निर्मित अब तक का सबसे सस्ता वाहन होगी।

अगले वर्ष फॉक्सवेगन भारत में पोलो हैचबेक भी लाने जा रही है जो सुजुकी स्विफ्ट और हुंडाई आई20 जैसी अन्य हैचबेक गाड़ियों की प्रतिस्पर्धा में उतारी जाएगी। ये गठबंधन टाटा मोटर्स की डीजल कारों इंडिका विस्टा और इंडिगो के समक्ष भी प्रतिस्पर्धा पेश करेंगी। सुजुकी डीजल इंजन तकनीक को जर्मनी से आयात करने पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि सुजुकी के पास डीजल तकनीक नहीं है। हालांकि दोनों कंपनियों का यह वैश्विक करार का मतलब यह नहीं है कि दोनों कंपनियां वितरण और डीलर नेटवर्क को शेयर करेंगी।

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