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राजिस्ट्रार कार्यालय में रही भारी भीड़

मूल आवंटी को आवंटन दरों पर रजिस्ट्री शुल्क जमा कराने की छूट के आखरी दिन अथॉरिटी और रजिस्ट्रार कार्यालय में भारी भीड़ रही। कुछ आवंटियों ने अथॉरिटी के सहायक प्रबंधकों पर रजिस्ट्री कराने में जानबूझ कर देरी करने के चलते हंगामा भी किया।


विदित हो कि जून में प्रदेश सरकार ने सभी अथॉरिटी में मूल आवंटी को सर्किल रेट की बजाए आवंटन दरों पर रजिस्ट्री कराने की आखरी मौहलत 12 दिसम्बर तय की थी। लेकिन शनिवार को अथॉरिटी में छुट्टी रहती है। छूट का लाभ लेने के प्रयास में लगे लोग अपने प्लाटों की रजिस्ट्री कराने के लिए सुबह की अथॉरिटी कार्यालय में जुटना शुरू हो गए थे। लेकिन जब देर शाम तक भी अधिकांश लोगों को क्लर्क और सहायक प्रबंधकों ने अटकाए रखा तो उनके सब्र का बांध टूट गया। एक महिला डाक्टर समेत कई पढ़े लिखे तबके के लोगों ने आरोप लगाया कि उनकी फाइलों पर जानबूझ देरी की जा रही है। सहायक प्रबंधक चन्द्रकांत सक्सेना से कुछ लोग हाथापाई पर आमदा हो गए लेकिन अन्य प्रबंधकों ने समझाबुझा कर मामला शांत करा दिया। रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री किए जाने का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। हालांकि खास बात यह भी है कि सर्किल रेटों पर रजिस्ट्री किए जाने के शासनादेश पिछले करीब एक दशक से किए जा रहे है। पर अन्तत: प्रदेश सरकार को आवंटियों के हित में फैसला लेते हुए छूट बढ़ानी पड़ी है।

 गुरूवार को हुई रजिस्ट्री  180
शुक्रवार को संख्या पहुंची 210

‘सर्किल रेटों पर यदि रजिस्ट्री की जाने लगी तो आवंटियों को लाखों की चपत लगेगी। सेक्टर अल्फा, बीटा, गामा व डेल्टा में दो से चार गुना बढ जाऐंगी दरें।’      -एडवोकेट पंकज माहुर

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