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सिर्फ रोचाी-रोटी नहीं,यह वजूद की लड़ाई है

सेवा नगर (बीकेटी) स्थित पेट्रोल पम्प दलित महिलाओं के मजबूत हौसले की मिसाल बन चुका है। चमाचम यूनीफार्म में विश्वास से भरी महिलाएँ जब पेट्रोल फिलिंग करती दिखाई देती हैं तो इन्हें पहली बार देखने वाले लोग चौंक जाते हैं। सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक की पारी में यहाँ नीलम, कृष्णावती, सरिता, गीता और रमा बिन्दास अन्दाज में गाड़ियों में पेट्रोल भरती दिखाई देती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की यह महिलाएँ कुछ साल पहले तक घर के चूल्हे-चौके से आगे की जिन्दगी नहीं जानती थीं लेकिन आज गाँव वालों के तानों और फब्तियों को अनसुना करके आत्मनिर्भर बन गई हैं। यह महिलाएँ अब अपने काम को रोी-रोटी के सवाल के साथ ही अस्तित्व की जंग भी मानती हैं।ड्ढr महिलाओं के मन में इस नए क्षेत्र में प्रवेश का श्रेय नीलम को जाता है। आठ साल पहले पति की अचानक मौत हो जाने पर इस काम को अपनाने की पहल उसी ने की। इसके बाद नीलम को देखकर ही बाकी महिलाओं को यह काम करने का हौसला मिला। नीलम अनपढ़ है लेकिन उसकी दिनरात की मेहनत का नतीजा है कि वह अब पेट्रोल पम्प पर मीटर के साथ ही कैश चेकिंग का काम भी बखूबी कर लेती है। नीलम का कहना है पति के गुजर जाने पर जब उसने यह काम करना शुरू किया तो गाँव वालों ने तरह-तरह की बातें शुरू कर दीं लेकिन बच्चों का पेट तो उसे ही पालना था इसलिए किसी की परवाह ही नहीं की। वहीं कृष्णावती बताती है कि पैंट शर्ट पहनने पर अब भी ताने सुनने पड़ते हैं पर फिक्र नहीं। गीता रमा और सरिता के घर खर्च में पति का हाथ बँटाती हैं। पेट्रोल पम्प के प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया कि नीलम को उन्होंने शुरूआत में पानी पिलाने के कार्य के लिए रखा था लेकिन उसमें विश्वास की झलक और हौसला देखा तो उसे फिलिंग का काम सौंप दिया। वैसे अब इन्दिरा नगर के इंडियन ऑयल आउटलेट पर भी तीन युवतियाँ पेट्रोल फिलिंग का कार्य कर रही हैं। इन्होंने पढ़ाई के बाद कुछ नया करने की चाह में यह राह चुनी।

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