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चाीतना है तो महिला वोटरों की सुननी होगी

इस बार के लोकसभा चुनाव में नारी शक्ित का भी काफी बोलबाला रहेगा। प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करने में उनकी अहम भूमिका रहेगी। प्रदेश के 11 करोड़ 61 लाख वोटरों में से पाँच करोड़ 27 लाख से अधिक महिला मतदाता हैं। खास बात यह है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीन जिले इलाहाबाद, जौनपुर तथा आजमगढ़ में महिला मतदाताओं की संख्या 14 लाख से ऊपर निकल गई है। ऐसे में सभी राजनीतिक दलों को महिला मतदाताओं को रिझाने के लिए भी प्रयास करने होंगे। शायद यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल अपने स्टार प्रचारकों में महिलाओं के नाम शामिल करने में जुटे हुए हैं। उनके कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। अमेठी में तो प्रियंका चुनाव अभियान शुरू भी कर चुकी हैं। नए परिसीमन के बाद तैयार मतदाता सूची में प्रदेश के 16 जिले ऐसे हैं जहाँ महिला वोटर10 लाख से अधिक हैं। लेकिन प्रत्याशी बनाने में कांूसीड्ढr इक्यावन में आठ। अस्सी में चार। चौबीस में चार। चौसठ में चार । यानी महिलाओं के आरक्षण से लेकर उनके अधिकारों की जोर-शोर से हिमायत करने वाले राजनीतिक दल लोकसभा चुनाव के टिकटों में आधी आबादी को भागेदारी देने के सवाल पर कंजूस ही साबित होने वाले हैं। कम से कम चार प्रमुख दलों कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी द्वारा अब तक घोषित प्रत्याशियों की सूची से तो यही संकेत मिलता है। यही नहीं, आधी आबादी के नाम पर जिन कुछ महिलाओं को इन दलों की सूची में स्थान मिला है उनमें भी अधिकांश या तो बड़े राजनीतिक घरानों से संबंधित होने के कारण चुनाव मैदान में हैं या फिर किसी मंत्री या बड़े नेता की पत्नी होने के नाते टिकट पाईं हैं।ड्ढr कांग्रेस ने अब तक सिर्फ 24 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की है। इनमें चार महिलाएँ हैं। जिसमें खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राजकुमारी रत्ना सिंह, रामपुर से बेगम नूरबानो शामिल हैं।ड्ढr ड्ढr

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