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माओं की नियुक्ति पर अधिक ध्यान देंगी भारतीय कंपनियां

माओं की नियुक्ति पर अधिक ध्यान देंगी भारतीय कंपनियां

भारतीय कंपनियां ऐसी कार्य संस्कृति लाना चाहती हैं जिससे महिलाएं काम के साथ घर की जिम्मेदारियों का भी निर्वाह कर सकें। एक सर्वेक्षण के अनुसार, प्रत्येक पांच में से तीन भारतीय कंपनियां अगले दो साल के दौरान पार्ट टाइम आधार पर काम पर लौटने वाली बाल-बच्चेदार महिलाओं की नियुक्ति की योजना बना रही हैं।

कार्यस्थल साल्यूशन प्रदाता रेगस पीएलसी द्वारा किए गए एक वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, करीब आधी कंपनियां (44 प्रतिशत) अगले दो साल के दौरान पार्ट टाइम आधार पर काम पर लौटने की इच्छुक बाल बच्चोंदार महिलाओं की नियुक्ति की योजना बना रही हैं।
   
सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारतीय कंपनियों की नियुक्ति की योजना वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा यानी 64 प्रतिशत है। भारतीय उद्योग जगत के लोगों का कहना है कि वे आर्थिक सुधार के दौर में कार्यस्थल पर पार्ट टाइम आधार पर ज्यादा बाल बच्चोंदार महिलाओं की नियुक्ति करना चाहेंगे।
   
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह अध्ययन में शामिल देशों में भारतीय कंपनियों ने नियुक्ति की सबसे अधिक इच्छा जताई है। वहीं नीदरलैंड इस मामले में सबसे पिछड़ा साबित हुआ है, जहां सिर्फ 24 प्रतिशत ने नियुक्ति में वृद्धि की संभावना जताई है। रेगस बिजनेस ट्रैकर सर्वेक्षण में करीब 11,000 लोगों से पार्ट टाइम, मां बनने के बाद लौटने वाली महिलाओं की नियुक्ति के बारे में सवाल किया था।

सर्वेक्षण में आगे कहा गया है कि पिछले कुछ दशकों में काम करने वाली बाल बच्चेदार महिलाओं के प्रति भारत के शहरी क्षेत्रों में नजरिये में बदलाव आया है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाजी माताओं से आज भी उचित व्यवहार नहीं होता है।

रेगस के कंट्री हेड मधुसूदन ठाकुर ने कहा कि आज कारोबार जगत समझ चुका है कि 9 से 5 बजे और सप्ताह में पांच दिन के परंपरागत कार्यसमय में यदि किसी तरह का लचीला रुख न अपनाया जाए, तो हो सकता है कि इससे कंपनी को योग्य प्रतिभा को गंवाना पड़े। ठाकुर ने कहा कि ऐसे समय जब ज्यादातर कंपनियां खर्चों में कटौती तथा मुनाफा बढ़ाने के लिए कदम उठा रही हैं, कंपनियां बिना प्रतिभावान योग्यता के परिचालन नहीं कर सकती हैं।

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