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रिश्तेदारों के घर नहीं ले जाते फ्रूट-मिठाई

नगर की आधा दर्जन कालोनियों में लोग रिश्तेदारों से मिलने के लिए उनके घर जाते समय फल-फ्रूट अथवा कुछ भी खाने की वस्तु नहीं ले जाते। ऐसा नहीं है कि लोगों ने पहले से चली आ रही परंपरा को गलत मान लिया है,बल्कि इन इलाकों में बंदरों का आतंक जबरदस्त छाया हुआ है। रोजाना ही एक ना एक व्यक्ति बंदरों द्वारा काटने का शिकार हो रहा है। गुरुवार देर शाम फिर बंदर ने कृष्णापुरा कालोनी में एक वृद्धा को अपना शिकार बनाया।

चिकित्सा प्रभारी के.सी तिवारी के अनुसार अस्पताल में रोजाना ही एक दो मरीज बंदर द्वारा काटने के आ रहे है।
नगर की तेलमिल गेट, कृष्णापुरा, मदनपुरा, दलीप पार्क, धोबीघाट (शिव बिहार) समेत आधा दजर्न कालोनियों में पिछले कई सालों से बंदरों का आतंक बना हुआ है। यहां रोजाना ही एक ना एक व्यक्ति या महिला बंदरों की शिकार होती है।


कृष्णापुरा निवासी वकीला पत्नी इमामुद्दीन ने बताया कि वह गुरुवार देर शाम घर के बाहर किसी काम से आई थी तभी बंदर ने उसपर वारकर दिया और उसके हाथ पर काट लिया। कालोनी में ऊषा, पूजा, अजय, सुधा, हेमा, रमेश रूहेला, आशा, नीटू पालीवाल हाल ही में बंदर द्वारा काटे जाने के शिकार है।


लोगों को कहना है कि इन कालोनियों में बंदरों के आंतक होने का मुख्य कारण शुगर मिल का निकट होना है। उनका आरोप है कि पहले समय-समय पर शुगर मिल व नगर पालिका परिषद द्वारा लंगूर कालोनियों में घूमाया जाता है जिससे बंदर वहां से भाग जाते थे लेकिन कई सालों से कालोनियों में लंगूर नहीं घुमाया गया है। जिसकारण यहां बंदरों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। बतातें चले कि इसी साल में मोदी शुगर मिल में कार्यरत एक मजदूर की बंदर द्वारा झपटा मारने से मौत भी हो गई थी।


इस बाबत नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी सतेन्द्र तिवारी का कहना है कि पालिका के पास ऐसा कोई बजट नहीं है जिससे इन बंदरों को बंधक बनाकर कहीं बाहर भेजा जा सके लेकिन इसके बाद भी यदि कोई शिकायत आएगी तो कार्रवाई की जायेगी। फिलहाल की स्थिति से निपटने के लिए लंगूर की व्यवस्था पालिका द्वारा की हुई है।

सितंबर माह में 26 लोग बंदर के काटे का शिकार हुए
अक्टूबर में 31 लोगों को बंदरों ने शिकार बनाया
नवंबर में 25 लोगों को बंदरों ने काटा
इनमें 5 वर्ष से 13 वर्ष तक की आयु के बच्चे सर्वाधिक शिकार हो रहे हैं

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