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गाँवों में सोनिया का हुआ सच से सामना

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का अपने संसदीय क्षेत्र के गाँवों में में शुक्रवार को कड़वे सच से सामना हुआ। दलित बस्तियों में घूमीं संप्रग प्रमुख को ‘विकास’ हकीकत में कागजों पर ही सिमटा नजर आया। कॉलोनी (इंदिरा आवास) और बीपीएल कार्ड न मिलने की शिकायतें करने वाली दलित महिलाओं के हाथ थामकर तसल्ली दी-जल्द ही सब ठीक होगा। केंद्र द्वारा प्रायोजित मनरेगा और मिड-डे-मील योजनाओं की बिगड़ी हालत देख सोनिया अवाक रह गईं। उन्होने साथ चल रहे अफसरों से कहा-यह सब क्या है? एक ग्रामीण बाजार में सब्जियों के रेट पूछकर सोनिया मुस्कुरा दीं।


आम चुनावों के बाद शुक्रवार को दूसरी बार संसदीय क्षेत्र के दौरे पर पहुँची सोनिया गांधी के  गाँवों के आकस्मिक भ्रमण की शुरुआत उन्नाव जनपद की सीमा पर बसे चंदमनखेड़ा की दलित बस्ती से हुई। चंदमन खेड़ा के चंद्रपाल पासवान के घर के बाहर एकत्र दलित महिलाएँ-सविता सरोजनी, सीमा, सूर्यकली और ऊषादेवी सोनिया को देख अचंभित थीं। सोनिया के ‘सब ठीक है’ के सवाल पर यह महिलाएँ उबल गईं-मैडम! हम पंचन का अबै तक कालोनी नहीं मिली। कुछ ने बताया-‘चार महीना ते शक्करौ नहीं पावा।’ सोनिया ने गाँव के कोटेदार को तलब कराया। कोटेदार ने बताया कि हमें खुद चार महीने से चीनी गोदाम से नहीं आवंटित हुई। मनरेगा के तहत बन रहे तालाब में सिर्फ 8 मजदूर ही काम कर रहे थे। इस पर वह प्रधान पर नाराज भी हुईं।


सोतवाखेड़ा गाँव में आदर्श जलाशय का काम देखने पहुँची सोनिया को गाँव के पूर्व प्रधान आनंददेव सिंह, साजन सिंह ने बताया कि 18 लोगों के फर्जी जॉबकार्ड बनाकर मजदूरी हड़प ली गई। मौके पर मौजूद प्रधान से इशारे में सोनिया ने पूछा। जवाब देने े बजाए प्रधान और पूर्व प्रधान में नोकझोंक शुरू हो गई। यहीं मौजूद कुछ दलित महिलाओं ने बताया कि हमारे कार्ड भी नहीं बनाए गए। दरियावखेड़ा में सड़क किनारे अधूरे पड़े तालाब के किनारे लगे बोर्ड पर अनुमानित लागत तो लिखी थी, पर और कोई जिक्र नहीं था। गाड़ी से उतरकर सोनिया तालाब तक गईं। गाँववालों ने बताया कि एक साल से तालाब अधूरा पड़ा है। पैसा हड़प लिया गया है। सोनिया ने साथ चल रहे खंड विकास अधिकारी से पूछा- काम क्यों बंद है। इसमें अब तक कितने मानव दिवस सृजित किए गए। कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होने बीडीओ को तालाब की पत्रवली के साथ एनटीपीसी के गेस्ट हाउस में शनिवार को हाजिर होने को कहा। उसरू गाँव में भी महिलाओं ने मनरेगा के तहत किए गए काम की मजदूरी न मिलने से सांसाद को अवगत कराया। अपने ही क्षेत्र में मनरेगा के इस खराब हाल पर सोनिया काफी चिंतित सी दिखीं।
कांग्रेस अध्यक्ष को मध्यान्ह भोजना योजना का क्रियान्वयन अच्छी हालत में नहीं मिला। बरवलिया गाँव के प्राथमिक स्कूल में बच्चों के लिए पकी खिचड़ी को सोनिया ने ढक्कन खुलवाकर देखा। उन्होने कहा कि इसमें दाल कम और चावल ज्यादा दिख रहा है। सोनिया के निर्देश पर किशोरीलाल शर्मा ने खिचड़ी का नमूना भी भरवाया। सोतवाखेड़ा गाँव के प्राइमरी स्कूल में डेढ़ माह से मिड-डे-मील न बनने की शिकायत शिक्षामित्र और अध्यापिकाओं ने की। सोनिया ने प्रधान को तलब किया तो बताया गया कि तालाब पर मौजूद हैं। सोनिया ने तालाब पर जाकर एमडीएम के बारे में प्रधान पूछा। उसने कहा- कोटेदार ने राशन ही नहीं दिया है।
मनरेगा और एमडीएम योजना के इस खराब हाल पर हतप्रभ सोनिया ने साथ चल रहे अफसरों से कहा कि यह सब क्या है? क्या इसी तरह योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन होता है। संप्रग प्रमुख के इस सवाल पर सभी अधिकारी निरुत्तर थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने डलमऊ में पिछले कार्यकाल में गंगा नदी पर मंजूर किए गए पुल को भी देखा। करीब 33 करोड़ की लागत से तैयार हो चुके इस पुल का उद्घाटन नहीं हुआ है। वायदे के तहत सोनिया ऊँचाहार विस क्षेत्र के पखरौली गाँव भी गईं। पिछली बार यहाँ के लोगों ने विद्युतीकरण न होने की शिकायत की थी। तभी कहा था कि काम हुआ या नहीं दुबारा देखने आऊँगी। सोनिया को गाँव में विद्युतकरण तो हुआ मिला, लेकिन बिजली की समस्या जस की तस थी। ग्रामीणों की इस शिकायत पर सोनिया ने कहा-यह राज्य सरकार का मामला है। गाँव के बाहर लगी बाजार में गाड़ी से उतरकर सोनिया सब्जियों के भाव भी पूछे। दाम सुनकर सोनिया मुस्कुराते हुए एनटीपीसी गेस्टहाउस चली गईं।

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