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अध्यापकों को प्रोन्नति मामला वृहद पीठ को भेजा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक विद्यालयों में पढ़ा रहे अध्यापकों को प्रोन्नति ना देने वाले विद्यालयों के प्रबंधकों के निर्णय को विचारार्थ वृहद पीठ को संदर्भित कर दिया है।


ऐसे विद्यालयों में पढ़ा रहे अध्यापकों को शासनादेश के मुताबिक 25 प्रतिशत पदों पर प्रोन्नति ना देने के पीछे अल्पसंख्यक विद्यालयों के प्रबंधकों का तर्क था कि इस प्रकार के मामले में सरकार का हस्तक्षेप संविधान के अनुच्छेद 30 के प्रतिकूल है। न्यामूर्ति ए.पी. शाही ने आगरा के स्वामी लीलाशाह आदर्श सिंधी इंटर कालेज चारबाग शाहगंज की याचिका पर यह आदेश दिया है। याचिका दायर कर विद्यालय की प्रबंध समिति ने उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि 25 प्रतिशत प्रोन्नति कोटे के अन्तर्गत कार्यरत अध्यापकों की अगर प्रोन्नति नहीं की जाती है तो प्रबंध समिति को बर्खास्त कर दिया जाएगा।


 याचिकर्ता के वकील का तर्क था कि प्रबंध सिमित को प्रोन्नति के लिए विवश करना गलत है क्योंकि इस प्रकार के आदेश से अल्पख्यंक विद्यालयों को संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत मिली छूट प्रभावित होगी।
 दूसरी ओर सरकारी वकील ने अपने तर्क में कहा था कि जो प्राइमरी स्कूल इंटरमीडिएट स्तर तक के हैं उसके कार्यरत अध्यापकों के लिए शासन आदेश 25 नवम्बर 2005 के मुताबिक 25 प्रतिशत तक पदों पर प्रोन्नति का अधिकार है और इस अधिकार से अध्यापकों को अल्पसंख्यक विद्यालय के प्रबंधकों द्वारा मना नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस मामले का वृहद पीठ को भेज दिया।

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  • Web Title: अध्यापकों को प्रोन्नति मामला वृहद पीठ को भेजा