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ऐसे बना औरों से अलग, ऑरो

ऐसे बना औरों से अलग, ऑरो

इस उम्र में एक किरदार को लेकर अमिताभ बच्चन का ऐसा प्रयोग यकीनन नए कलाकारों के लिए किसी किताब में दर्ज कराने का दर्जा रखता है। न केवल मेकअप के लिहाज से, बल्कि ‘पा’ में उनकी बेजोड़ अदाकारी के अंदाज से भी कोई क्यों न उनकी तारीफ करे। ऐसा नहीं है कि बिग बी ने इससे पहले अपने किरदारों के लिए प्रयोग नहीं किये या फिर किसी फिल्म में उनके मेकअप की चर्चा नहीं हुई। फिल्म ‘ब्लैक’ में उनका एक सख्त टीचर का रोल बेशक आमिर खान को नागवार गुजरा हो, लेकिन उस किरदार का लोहा इंडस्ट्री के दिग्गज मानते हैं। भरी जवानी में ‘शहंशाह’ के उस गैटअप को कौन भूल सकता है, जो अंधेरी रातों में सुनसान राहों पर एक मसीहा की तरह रातों रात दर्शकों के दिलों में उतर गया था। यही नहीं, ‘अग्निपथ’ में तो उन्होंने एक माफिया डॉन के किरदार के लिए अपनी आवाज में एक अलग तरह का तेवर पैदा किया था।

बेशक वो दौर और था। आज बिग बी एक महानायक के रूप में हमारे सामने हैं। ‘पा’ का निर्माण भी उनकी ही कंपनी ने किया है। तो क्या इससे इस किरदार के सामने आने वाली तमाम मुश्किलें चुटकी में हल हो गई होंगी। जब ‘पा’ के निर्देशक बाल्कि उनके पास इस फिल्म के प्रस्ताव के साथ आये तो सबसे पहले उनके दिमाग में क्या सूझा? इसका जवाब अमित जी कुछ इस तरह से देते हैं, ‘बाल्कि का आइडिया सुनते ही मैं उछल पड़ा। एक कलाकार होने के नाते ऐसा किरदार करना मेरे लिए वाकई चुनौतीपूर्ण था। यह एक बेहतरीन कॉन्सेप्ट था। बाल्कि ने स्क्रिप्ट पर काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने मुझे फिल्म की कहानी सुनाई। कहानी मुझे पसंद आयी, पर मुझे बदलाव की  गुंजाइश महसूस हुई। कुछ बड़े फेरबदल कर वह दोबारा मेरे पास आये। उन्होंने मुझे फिर से स्क्रिप्ट सुनाई, जो आज एक फिल्म के रूप में आपके सामने है।’

 ‘पा’ कहानी के पूरा होने के बाद दूसरा सबसे बड़ा काम था अमिताभ बच्चन के मेकअप का।  हिन्दी फिल्मों में इससे पहले ऐसा किरदार कभी न तो लिखा गया था और न किसी का ऐसा मेकअप किया गया था। बहरहाल, ऑरो के मेकअप के लिए हॉलीवुड से  विशेषज्ञ बुलवाए गए। इस बारे में अमिताभ कहते हैं, ‘फिल्म के निर्माण का एक बड़ा हिस्सा मेकअप पर ही खर्च हुआ है। हम बैस्ट देना चाहते थे, इसलिए किसी भी चीज से समझौता करना पूरी लड़ाई को निर्थक कर देता। हॉलीवुड के ऑस्कर विजेता क्रिश्चियन किफ्ली ने इस विषय में मेरे साथ 2-4 मुख्य वार्ताओं में भाग लिया। मेकअप के मामले में हॉलीवुड के मेकअप आर्टिस्ट्स की विश्वभर में मांग है, जिसके लिए वह उस हिसाब से पैसा भी चार्ज करते हैं। फिर भी हर फिल्म मेकअप के भारी-भरकम बजट को सहन नहीं सकती।’

हॉलीवुड से आर्टिस्ट बुलवाने के बावजूद ‘पा’ का बनना आसान न था।  घंटों के मेकअप के बाद अमिताभ को  लगातार सात-आठ घंटे तक शूटिंग भी करनी पड़ती थी और मेकअप को छुड़ाने के लिए दो घंटे से भी अधिक समय लगता था। इस दौरान न तो वह खा सकते थे, न पी सकते थे, न पढ़ सकत थे और न ही कहीं जा सकते थे, जबकि अमूमन जटिल मेकअप के दौरान भी कलाकार ऐसा कुछ न कुछ तो कर ही लेते हैं, जिससे वह थोड़ा रिलेक्स फील कर सकें। ‘पा’ के मेकअप सेशन के बारे में अमिताभ कहते हैं, ‘मेकअप के दौरान मैं जड़ होकर बस एक जगह पर बैठा रहता। मेकअप के लिए प्रोस्थेटिक्स का इस्तेमाल किया गया था, जो सिलिकॉन से बनी होती है। ‘ऑरो’ का चेहरा आठ अलग-अलग भागों का मिश्रण है, जिनका मिलान और जुड़ाव एकदम सटीक होना बहुत जरूरी था। मेकअप करने से ज्यादा सावधानी उसे छुड़ाने में बरतनी जरूरी थी। ध्यान रखना पड़ता था कि कहीं मेकअप छुड़ाते समय चेहरे की त्वचा भी साथ ही न निकल पड़े। कोई भी कलाकार प्रोस्टेथिक्स को तीन दिन से ज्यादा इस्तेमाल नहीं कर सकता, क्योंकि स्किन को हवा की भी जरूरत होती है, वर्ना त्वचा पर रैशेज के साथ इंफेक्शन का खतरा रहता है। जब कभी हमें सुबह 6 बजे शूटिंग करनी पड़ी, तब मुझे चार बजे से पहले ही मेकअप के लिए जाना पड़ता और फिर 7 घंटे तक लगातार शूटिंग करनी पड़ती। शुक्र है कि इस दौरान मेरी त्वचा को कुछ नहीं हुआ।’ ।

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