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28 जनवरी, 2020|12:18|IST

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कर और कर्तव्य

दिल्ली नगर निगम से दिल्ली वासियों की शिकायत पहले ही कम नहीं थी और अब पेशेवर कर लगाए जाने के बाद वह और बढ़ जाएगी। लोकतंत्र में अगर करदाताओं के कर्तव्य हैं तो अधिकार भी हैं। उसी प्रकार कर लेने वाले स्थानीय निकायों के अगर अधिकार हैं तो कर्तव्य भी हैं। सिद्धांत यही है कि जहां भी कर होगा वहां प्रतिनिधित्व भी होगा और कर्तव्य भी। लेकिन उत्तर भारत के तमाम नगर निकायों की तरह ही दिल्ली का मुख्य निकाय यानी नगर निगम भी अक्षमता, भ्रष्टाचार और अकर्मण्यता का अड्डा है।

पिछले दिनों हुए इस खुलासे ने दिल्ली ही नहीं पूरे देश को चौंका दिया था कि यहां बीस हजार फर्जी कर्मचारी हैं, जिन पर करदाताओं का सालाना 200 करोड़ रुपए लुटा दिया जाता है। दिल्ली की जनता की इस नाराजगी के तपते अलाव में निगम ने संपत्ति वृद्धि के साथ पेशेवर कर प्रस्ताव का घी डाल दिया है। इतना ही नहीं उसने इस दायरे में दिल्ली में काम करने वाले तीस हजारी आय के सभी लोगों को शामिल कर नाराज लोगों का घेरा और बढ़ा दिया है।

दिल्ली में पेशेवर कर का विरोध करने वालों की यह जमात कितना रंग दिखा पाएगी, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन यह कर उत्तर भारत के उन तमाम हिंदी भाषी राज्यों के लिए एक चेतावनी की तरह है जहां अभी तक ऐसा नहीं रहा है। दिल्ली में पहली बार लागू किया जाने वाला यह कर नया नहीं है। यह कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और गुजरात जैसे छह राज्यों में पहले से है और वे राज्य इसकी सीमा 2500 रुपए सालाना से बढ़ाकर 7500 करने की मांग भी कर रहे हैं। पर केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष कर में कमी हो जाने की आशंका के चलते इसे मंजूरी नहीं दी जा रही है।

लेकिन जितनी तेजी से बड़े शहरों का विस्तार और बाकी हिस्सों का शहरीकरण हो रहा है उसमें इस तरह के कर की जरूरत और लालच उत्तर प्रदेश, बिहार या उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी पैदा हो सकती है। जाहिर है, अगर दक्षिण के राज्यों की तुलना में दिल्ली का स्थानीय निकाय अक्षम है तो दिल्ली की तुलना में इन उत्तरी राज्यों के निकाय और भी ज्यादा नकारा हैं। ऐसी स्थिति में एक तरफ शहरीकरण और उसके अच्छे रखरखाव के लिए संसाधन जुटाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ नौकरी पेशा नागरिकों पर ही अतिरिक्त बोझ न डालने का न्यायिक आग्रह भी। जाहिर है अब निकायों को ज्यादा पारदर्शी और कुशल बनाना होगा और करों को खास हिस्से पर केंद्रित करने के बजाय उसका दायरा बढ़ाना होगा। 

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  • Web Title:कर और कर्तव्य