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प्लूटोनियम

प्लूटोनियम एक दुर्लभ ट्रांसयूरेनिक रेडियोएक्टिव तत्व है। इसका रासायनिक चिह्न् pu और आण्विक भार 94 है। प्लूटोनियम के छह अपरूप होते हैं। यह एक ऐक्टिनाइड तत्व होता है जो कि दिखने में सिल्वर व्हाइट रंग का होता है। प्लूटोनियम-238 का अर्धआयुकाल 87.74 वर्ष होता है। प्लूटोनियम-239, प्लूटोनियम का एक महत्वपूर्ण समस्थानिक होता है जिसका अर्धआयुकाल 24,100 वर्ष होता है। प्लूटोनियम-244, प्लूटोनियम का सबसे अधिक स्थाई समस्थानिक होता है। इसका अर्धआयु काल 8 करोड़ वर्ष होता है।

वैज्ञानिक एनरिको फर्मी और उनके दल के सदस्यों ने 1934 में प्लूटोनियम की खोज की थी। फर्मी ने तब इसे हेस्पेरियम कहा था और 1938 में अपने नोबेल भाषण में इसका जिक्र किया था। प्लूटोनियम को पहली बार 14 दिसंबर, 1940 को उत्पादित किया गया था और इसकी रासायनिक पहचान 23 फरवरी, 1941 को ग्लेन टी. सीबोर्ग, एडविन एम. मैकमिलन, जे.डब्लयू केनेडी ने की थी। मैकमिलन ने इसका नाम प्लूटो ग्रह के आधार पर रखा था। प्लूटोनियम-239 का प्रयोग नाभिकीय हथियारों में मुख्य विखंडनीय तत्व के रूप में होता है। यह बड़ी मात्र में ऊष्मीय ऊर्जा और कम लेवल के गामा कणों का उत्सजर्न करता है।

रेडियोएक्टिविटी के गुण के कारण प्लूटोनियम के समस्थानिक और कंपाउंड जहरीले होते हैं। जहां तक रासायनिक तौर पर इसके जहरीलेपन की बात है तो यह आर्सेनिक और सायनाइड की तुलना में कम जहरीला होता है। अन्य धातुओं की तरह प्लूटोनियम ऊष्मा और बिजली का अच्छा चालक नहीं होता। प्लूटोनियम एलॉय बना सकने में सक्षम होता है। 

(पाठकों की मांग पर)

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