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पटना में बिखरी पौधों की छटा

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित सरस मेले में विभिन्न तरह के पौधे लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। इन पौधों में कालमीक, एलोवेरा, अश्वगंधा, भाषतारा आम्रपाली तथा लैला-मजनू के पौधे मुख्य हैं।

पौधों के स्टॉल्स पर लोगों की भीड़ देखी जा रही है। लोग इन पौधों की जमकर खरीददांरी भी कर रहे हैं। पटना विश्वविद्यालय में वनस्पति शास्त्र के छात्र सुबोध कुमार बताते हैं कि यहां कई प्रकार के पौधे हैं, जिनके विषय में जाना जा सकता है। वह कहते हैं कि बिहार में एक ही स्थान पर इतने प्रकार के पौधे को देखना सुखद है।

उधर, वैशाली जिले से आए एवं कृषि प्रौद्योगिकी अभिकरण (आत्मा) संस्था से जुड़े राजेश कुमार ने बताया कि उनके स्टॉल के अधिकांश पौधे पश्चिम बंगाल से मंगवाकर विकसित किए गए है तथा उन्हें इस मेले के लिए तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि ‘लैला-मजनू’ पौधे के अलावा भाषतारा आम्रपाली की भी खूब बिक्री हो रही है जबकि कई पौधों को लोग देखने आ रहे हैं। वह बताते हैं कि लैला-मजनू पौधे की मांग जहां युवा वर्ग खूब कर रहा है वहीं भाषतारा आम्रपाली के पौधे की मांग बढ़ने का कारण इसका एक वर्ष में तीन बार फल देना है। इसके अलावा आमों के प्रकार में महिका तथा अलफांजो के पौधों की भी बिक्री हो रही है।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रलय और राज्य के ग्रामीण विकास विभाग के संयुक्त तत्वाधान में लगे सरस मेला-2009 में 250 स्टॉल आवंटित किए गए हैं। यहां प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हो रहे हैं। तीन दिसंबर से प्रारंभ यह मेला 14 दिसंबर तक चलेगा।

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