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महानगरीय जिंदगी में काफी जरूरी है पड़ोसियों का सहयोग

एक समझदार पड़ोसी माहौल को स्वर्ग बना देता है। पड़ोसियों का हमारी जिंदगी में काफी अहम स्थान होता है। ग्रामीण इलाकों में पड़ोसी जहां परिवार के सदस्यों की तरह होते हैं वहीं महानगरीय समाज में व्यस्तता के कारण लोग अपने पड़ोसियों से कट से जाते हैं।

समाजशास्त्री अनिल ओहरी का मानना है कि लोग जिस तरह से सप्ताहांत में अपने परिवार को समय देते हैं उसी तरह थोड़ा वक्त अपने पड़ोसियों के साथ बिताएं तो कई तरह की समस्याएं अपने आप हल हो जाती हैं।

वह कहते हैं कि छोटी-मोटी समस्याएं मसलन घर के सामने पार्किंग, पार्टियों में तेज संगीत या इस तरह की बातों को लेकर होने वाला तनाव बातचीत के माध्यम से दूर हो जाता है। साथ ही विषम परिस्थितियों में पड़ोसी काफी सहायक साबित होते हैं।

उनका कहना है कि महानगर में एकाकीपन ज्यादा है और यहां परिवार का आकार भी छोटा होता है। अगर कोई व्यक्ति कार्यालय गया है और उसके घर में पत्नी या बच्चा बीमार है तो कार्यालय दूर होने की स्थिति में वह फोन कर अपने पड़ोसी से सहायता मांग सकता है। ओहरी कहते हैं कि यह तभी संभव है जब पड़ोसियों से संबंध मधुर हों।


एक ही क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच सामंजस्य और बातचीत जरूरी है और इसके कई फायदे साफ नजर आते हैं। मसलन पड़ोसियों के बीच सौहार्द एवं प्रेम भाव बनाए रखने के लिए राजधानी स्थित नेब सराय के निकुंज अपार्टमेंट के लोग हर 15 दिन में बैठक करते हैं, जिसमें सभी फ्लैटों के लोग स्वैच्छिक तौर पर हिस्सा लेते हैं।

इस सोसायटी के अध्यक्ष सत्यप्रकाश का कहना है कि इसका मकसद होता है कि यहां रहने वाले लोगों की एक-दूसरे से बातचीत करने में झिझक खत्म हो जाए। उनका कहना है कि इससे सोसायटी के लोगों में आपसी समझदारी भी बढ़ी है और छोटी-छोटी बातों को लेकर आपसी कलह जैसी समस्या नहीं आती।

सत्यप्रकाश कहते हैं कि जब छुटि्टयों में शहर से बाहर कुछ समय के लिए लोग जाते हैं तो वह अपने पड़ोसी को सूचित कर जाते हैं, जिससे चोरी का डर नहीं होता।

वह कहते हैं कि पिछले पांच वर्षों से उनकी सोसायटी में चोरी नहीं हुई और इसके पीछे सुरक्षा के अलावा चौकस पड़ोसियों का अहम योगदान है। हाय नेबर डे जैसा कोई दिवस हमारे देश में मनाने की परंपरा नहीं है, लेकिन यूरोप में पूरे दिसंबर महीने में इस दिवस को मनाया जाता है। वहां लोग अपने दोस्तों एवं पड़ोसियों को यादगार उपहार भेजते हैं या टी पार्टी, किटी पार्टी जैसे आयोजन कर अपने पड़ोसियों से रूबरू होते हैं।

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  • Web Title:महानगरीय जिंदगी में जरूरी है पड़ोसियों का सहयोग