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कृषि पर ग्लोबल वार्मिंग के कुप्रभाव से पीएम चिंतित

कृषि पर ग्लोबल वार्मिंग के कुप्रभाव से पीएम चिंतित

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने जलवायु परिवर्तन के चलते भूमि जल के गिरते स्तर और फसलों के उत्पादन पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभावों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि कृषि एवं जलनीति के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने गुरुवार को सिंचाई क्षेत्र में हुए विकास पर आयोजित पांचवें एशियाई क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि देश में इस साल जहां कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में भयंकर बाढ़ का सामना करना पड़ा वहीं दूसरी ओर करीब 300 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया।

उन्होंने कहा कि ऐसे असंतुलन जलवायु संबंधी समस्याओं से और बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि इसके अलावा जलवायु परिवर्तन देश के भूमि जलस्तर एवं उसकी गुणवत्ता को भी प्रभावित करेगा, जिसका फसलों के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की भी आशंका है जो चिंता का विषय है।

मनमोहन सिंह ने कहा कि देश में सिंचाई का विस्तार कर न केवल कृषि उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि जल का बेहतर इस्तेमाल करने की रणनीति तैयार की जा सकती है। उन्होंने कहा कि देश में खाद्य आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए पानी और कृषि नीतियों के बीच उचित समन्वय होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में जटिल अंतरसंबंधों को बेहतर ढंग से जारी रखने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय जल आयोग का गठन किया है, जो जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के आठ मिशनों में से एक है।


मनमोहन सिंह ने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता कृषि की विकासदर दो गुना बढ़ाकर चार प्रतिशत करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हम अपने कृषि क्षेत्र में तेजी से सार्वजनिक निवेश कर रहे हैं। कृषि से संबंधित निवेश में सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र पानी की व्यवस्था और उसका सही इस्तेमाल है। हमें इस बात की पूरी उम्मीद है कि इस योजना के दौरान एक करोड़ 60 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि देश में दूसरी हरित क्रांति निजी क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास करके लाई जा सकती है। प्रधानमंत्री ने कृषि जल प्रबंध पहल में किसानों को प्रमुख अंशधारक बताते हुए कहा कि पानी से संबंधित मुद्दों को हल करते हुए स्थानीय लोगों की पूरी तरह भागीदारी होनी चाहिए तथा कृषि जल प्रबंध पहल में किसानों की सलाह अवश्य ली जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में खाद्यान उत्पादन में महिलाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। देश में फैसला लेते समय महिलाओं को शामिल करने के विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय जल संसाधन मंत्री पवन कुमार बंसल और सचिव यूएन पंजियार ने भी अपने विचार रखे। सम्मेलन का मुख्य विषय `प्रौद्योगिकी उन्नयन और उचित देखभाल के माध्यम से सिंचाई परियोजनाओं में सुधार' है।

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