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रोल मॉडल बनीं कांति

मात्र वीं कक्षा तक पढ़ी दलित महिला कांति देवी के जज्बे को सलाम। जब से वह सरपंच बनी हैं इलाके में शांति स्थापित है। कभी अति उग्रवादग्रस्त इलाके में शुमार पालीगंज की खनपुरा तारणपुर पंचायत से अब थाने में नाममात्र केस जाते हैं। दरअसल कांति तमाम छोटे-मोटे झगड़ों को ग्राम कचहरी में ही निपटा देती हैं। अब तक बगैर किसी सरकारी मदद के एक दर्जन से अधिक मामलों को निपटाने वाली कांति देखने में तो एकदम साधारण महिला लगती हैं, पर लोगों की समस्याओं के बाबत अफसरों से बात करने के अंदाज के क्या कहनें। इंदिरा आवास, वृद्धावस्था पेंशन आदि योजनाएं पास कराने के बाबत पूछने पर कि कैसे कर लेती हैं, इतना सबकुछ।ड्ढr ड्ढr वह सहज भाव से मुस्कुराते हुए कहती हैं कि ‘सुबह बजे तक घर का काम निबटाने और बच्चों को स्कूल भेजने के बाद जनता के काम में जुट जाती हूं, तो देरशाम तक सिलसिला चलता रहता है। पति प्रदीप कुमार व ग्रामीणों की प्ररणा से सरपंच का चुनाव लड़ी और 1055 रिकार्ड मतों से जीत दर्ज कर अपनी लोकप्रियता का परचम लहराया। सरपंच बनने से पहले जहानाबाद में ‘ज्ञान गुहार’ अभियान में शामिल हो गांव-गांव में शिक्षा का अलख जगानेवाली कांति की दिली ख्वाहिश है कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ें। किसी के भरोसे नहीं, खुद के बूते अपना मुकाम बनाएं।ड्ढr ड्ढr अपनी दालान पर ही ग्राम कचहरी हर शनिवार लगानेवाली कांति कहती हैं कि न भवन बना है, न ही फर्नीचर है, लेकिन कुछ भी हो, मैं रुकने वाली नहीं। कुल मिलाकर पंचायती राज व्यवस्था की उपज कांति महिलाओं की रोल मॉडल बनकर उभरने लगी हैं।

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  • Web Title: रोल मॉडल बनीं कांति