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कोपेनहेगन में दिख सकती है क्योटो की झलक

कोपेनहेगन में दिख सकती है क्योटो की झलक

डेनमार्क के कोपेनहेगन में चल रहे जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अब तक के सबसे बड़े सम्मेलन में ग्लोबल वार्मिंग से बचने के जो उपाय प्रस्तावित किए जाएंगे, उनमें क्योटो प्रोटोकाल की झलक दिख सकती है।

सम्मेलन के मेजबान डेनमार्क की ओर से पेश जिन प्रस्तावों को परस्पर सहमति का आधार बनाया जाना है, उसके कुछ अंश प्राप्त हुए हैं। इसके अनुसार विकसित देश क्योटो प्रोटोकॉल के मद्देनजर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने और इसकी मात्रा निश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराएंगे।

क्योटो प्रोटोकाल 1997 में अस्तित्व में आया था। इसके तहत अमेरिका को छोड़कर सभी औद्योगिक देश 2012 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी का वचन दे चुके हैं। दस्तावेजों के प्राप्त अंश से लगता है कि सम्मेलन के बाद क्योटो प्रोटोकॉल का परिमार्जित संस्करण अस्तित्व में आए और इसमें अमेरिका तथा अन्य विकसित देशों के लिए कुछ उपबंध शामिल किए जाएं।

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