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केंद्र ने अलग तेलंगाना राज्य के गठन की मांग मानी

केंद्र ने अलग तेलंगाना राज्य के गठन की मांग मानी

दबाव के आगे झुकते हुए केंद्र ने बुधवार को रात अलग तेलंगाना राज्य के गठन की मांग मान ली और इस संबंध में प्रक्रिया शुरू की जाएगी और आंध्र प्रदेश विधानसभा में उचित प्रस्ताव पेश किया जाएगा। यह फैसला बुधवार को देर रात प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रोसैया के साथ बैठक में किया गया। इससे पहले सोनिया गांधी और मनमोहन मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ कांग्रेस कोर समूह की दो दौर की बैठक हुई।
   
गृह मंत्री पी चिदंबरम ने देर रात कहा कि इन विचार-विमर्शों के बाद मैं यह वक्तव्य दे रहा हूं। अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। एक उचित प्रस्ताव राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा। केंद्र और कांग्रेस पार्टी को यह फैसला टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव के स्वास्थ्य में और गिरावट आने के बाद लेने को मजबूर होना पड़ा। उनका आमरण अनशन बुधवार को 11 वें दिन में प्रवेश कर गया और समूचे तेलंगाना क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इससे बड़ी अनहोनी होने की आशंका व्याप्त हो गई।
    
हालांकि चिदंबरम ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह प्रस्ताव कब पेश किया जाएगा लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इसे गुरुवार को राज्य विधानसभा में पेश किया जाएगा। अलग राज्य के गठन के लिए संसद के दोनों सदनों में विधेयक को पारित करना होगा। चिदंबरम ने कहा कि केंद्र सरकार राव के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है और उनसे अपना आमरण अनशन वापस लेने का अनुरोध किया।

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि अलग तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और आंध्र प्रदेश विधानसभा में इसका प्रस्ताव रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र ने आंध्र प्रदेश के मुख्य़मंत्री से अलग तेलंगाना राज्य के गठन से संबंधित आंदोलन से जुड़े नेताओं, छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ मामले वापस लेने का अनुरोध किया है। जिसके बाद मुख्यमंत्री के रौसेया ने कहा कि वह उचित कदम उठाएंगे। चिदंबरम ने कहा कि हम चंद्रशेखर राव के स्वास्थ्य के बारे में चिंतित हैं। हम सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सभी छात्रों से अपना आंदोलन वापस लेने की अपील करते हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से इस साल 29 नवंबर को खम्मम में राव के आमरण अनशन पर बैठने के बाद नेताओं, छात्रों और अन्य के खिलाफ दायर मामलों को वापस लेने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने कहा कि रोसैया ने सरकार को सूचित किया कि वह आवश्यक कदम उठाएंगे। गृह मंत्री ने छात्रों से भी अपना आंदोलन वापस लेने को कहा।

तेलंगाना राज्य के गठन पर सरकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया आने के बाद टीआरएस प्रमुख चंद्रशेखर राव ने बुधवार को देर रात अपना 11 दिन से चल रहा अपना अनशन समाप्त कर दिया।

चिदंबरम ने कहा कि सरकार विगत कुछ दिनों में तेलंगाना में आंदोलन को लेकर चिंतित रही है। गृह मंत्री ने कहा, हमने व्यापक विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री यहां नहीं थे। वह मंगलवार को लौटे हैं और इसके बाद हमने मुख्यमंत्री के साथ विचार-विमर्श किया। तेलंगाना क्षेत्र में आंध्र प्रदेश विधानसभा की 294 में से 119 सीटें आती हैं जबकि लोकसभा की 42 में से 17 सीटें इसके अंतर्गत आती हैं।

टीआरएस का 2001 में अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर राव ने गठन किया था। उन्होंने तेदेपा छोड़कर नयी पार्टी का गठन किया था। वह 2004 के लोकसभा चुनावों के बाद संप्रग का हिस्सा थे लेकिन 2006 में उन्होंने यह कहकर कांग्रेस से किनारा कर लिया कि संप्रग उनकी मांगों पर कुछ भी नहीं कर रही है।
   
जहां 2004 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी पांच सीटों पर विजयी हुई थी वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में वह सिर्फ दो सीटें हासिल कर सकी। आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी उसे जोरदार झटके का सामना करना पड़ा। यह फैसला उस दिन किया गया जब लोकसभा में दलगत राजनीति से उपर उठकर सभी पार्टियों के नेताओं ने राव के स्वास्थ्य को लेकर चिंता प्रकट की और तत्काल केंद्र से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया।

केंद्र का फैसला ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना क्षेत्र से कांग्रेस के 15 सांसदों ने इस मांग का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने सोनिया गांधी से मुलाकात की और अलग तेलंगाना राज्य के गठन की मांग की। इससे पहले, रोसैया ने कहा कि इस संबंध में केंद्र को फैसला करना है।
   
राव के अनशन के 11 वें दिन में प्रवेश करने के बाद उनके शरीर में प्रोटीन की कमी हो गई। उन्होंने नस के जरिए तरल पदार्थ लेने से इनकार कर दिया था। लेकिन दोपहर में चिकित्सकों ने बताया कि उनके स्वास्थ्य में मामूली सुधार हुआ है जब उन्होंने नस के जरिए तरल पदार्थ लेने पर सहमति जता दी। हैदराबाद मार्च से पहले राज्य की राजधानी और समूचे तेलंगाना क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। वहां भारी संख्या में पुलिस बलों को तैनात कर दिया गया। किसी तरह के प्रदर्शन को रोकने के लिए सैकड़ों कार्यकर्ताओं को पकड़ लिया गया।

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