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कोर्ट को नहीं जंचे पैरोल पर निर्देश

केन्द्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश पर कैदियों को पैरोल दिये जाने के बारे में नए दिशानिर्देश पेश कर दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश ए. पी. शाह और न्यायाधीश एस. मुरलीधर के समक्ष सोलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम द्वारा पेश किए गए दिशानिर्देशों में हत्या, बलात्कार, बाल अपराध्र, घातक हमला, देशद्रोह सहित गंभीर किस्म के सभी अपराधों के दोषसिद्ध अपराधियों को पैरोल न देने की बात की गई है।

जेसिका लाल हत्याकांड के दोषी मनु शर्मा को पैरोल दिए जाने से उत्पन्न विवाद पर स्वत. संज्ञान लेते हुए अदालत ने सरकार से दिशानिर्देश बनाने को कहा था।हालांकि अदालत ने इसमें पेश की गई अपराधों की लंबी फहरिस्त पर कहा ‘इस सूची के मुताबिक तो किसी को पैरोल भी पैरोल नहीं मिल सकेगी।’ इस पर सुब्रमण्यम ने कुछ संशोधनों के साथ नई गाइडलाइन गुरूवार को पेश करने का भरोसा दिलाया।

इस दौरान सुब्रमण्यम ने सिर्फ रसूख वालों को ही पैरोल मिलने के आरोपों को भी गलत बताया। सुब्रमण्यम ने कहा कि नए दिशानिर्देशों के तहत गंभीर बीमारी के आधार पर पैरोल तभी दी जाएगी जब मेडिकल अफसर इसका प्रमाण पत्र दे देगा। इसके बिना किसी भी बीमारी में पैरोल नहीं मिलेगी।

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