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खनिज चुगान न होने से दोहरी मार : निशंक

गौला और दून वैली की नदियों से रेता, बजरी व बोल्डर के चुगान पर प्रतिबंध से प्रदेश को दोहरी मार ङोलनी पड़ रही है। यदि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय ने इसकी अनुमति नहीं दी तो राज्य जल्द इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करेगा। 

सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में जनता मिलन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि राज्य की नदियों से खनिज के चुगान की एक सामान्य सी प्रक्रिया है लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय इसकी भी अनुमति नहीं दे रहा है।

इस मामले को लेकर राज्य अब सुप्रीम कोर्ट में लड़ रहा है। डा. निशंक ने कहा कि गौला व दून वैली की नदियों से चुगान पर पिछले छह माह से प्रतिबंध लगा है, जबकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय में उसी दौरान अनुमति के लिए राज्य ने आवेदन कर दिया था।

इस मामले पर उन्होंने ने शिमला में हिमालयी राज्यों के सम्मेलन के दौरान केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश से बात की थी। रमेश ने आश्वस्त किया था कि वे इस मामले में एक सप्ताह में अनुमति दे देंगे। एक सवाल पर डा. निशंक ने कहा कि इस संबंध में छोटी से छोटी सूचनाएं केंद्रीय पर्यावरण मंत्रलय को दे दी गई हैं लेकिन इस बंदी से राज्य पर दोहरी मार पड़ रही है।

एक तो लोगों को रेता, बजरी अधिक दामों पर मिल रही है दूसरा समय पर कार्य नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार रेता, बजरी व बोल्डर के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी कर रही है। इसके लिए सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। ताकि राज्य के लोगों का कार्य न रुके और उन्हें सस्ती दरों पर खनिज उपलब्ध हो सके।

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